गुरुवार, 30 जुलाई 2026 का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा। बुधवार की शानदार तेजी के बाद निवेशकों को उम्मीद थी कि बाजार उसी रफ्तार को आगे बढ़ाएगा, लेकिन शुरुआती कारोबार में तस्वीर कुछ अलग नजर आई। कमजोर वैश्विक संकेतों और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली के चलते बाजार दबाव में आ गया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ आईटी सेक्टर ने मजबूती दिखाई और बाजार को बड़ी गिरावट से बचा लिया। पूरे दिन निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी रही। सपाट शुरुआत के बाद बढ़ा दबाव कारोबार की शुरुआत लगभग सपाट रही। शुरुआती मिनटों में बीएसई सेंसेक्स करीब 26 अंकों की बढ़त के साथ 77,681 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 50 भी लगभग 18 अंकों की मामूली तेजी के साथ 24,267 के स्तर पर खुला। शुरुआत में बाजार में ज्यादा उत्साह नहीं दिखा क्योंकि विदेशी बाजारों से मिले-जुले संकेत मिल रहे थे। सुबह करीब 10 बजे के बाद माहौल बदलने लगा। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं ने निवेशकों की धारणा पर असर डाला। इसका परिणाम यह हुआ कि सेंसेक्स करीब 200 अंक फिसलकर 77,450 के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,200 के नीचे खिसक गया। बैंकिंग शेयरों में बिकवाली ने इस गिरावट को और तेज कर दिया। आईटी सेक्टर बना बाजार का सबसे बड़ा सहारा जहां बैंकिंग और कई अन्य सेक्टर दबाव में रहे, वहीं आईटी कंपनियों ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इंफोसिस, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे दिग्गज शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। कुछ शेयरों में लगभग 2.68 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इस मजबूती का असर पूरे आईटी इंडेक्स पर दिखाई दिया और निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1.7 प्रतिशत तक मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तिमाही नतीजों और टेक सेक्टर को लेकर सकारात्मक उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। बैंकिंग शेयरों ने बढ़ाई चिंता आईटी की मजबूती के उलट बैंकिंग सेक्टर में कमजोरी बनी रही। आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते निफ्टी बैंक इंडेक्स करीब आधा प्रतिशत तक नीचे आ गया। इसके अलावा एशियन पेंट्स, अडानी पोर्ट्स, इटरनल, इंडिगो और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे प्रमुख शेयर भी दबाव में रहे। इनमें करीब 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की व्यापक धारणा पर असर पड़ा। मिडकैप और स्मॉलकैप में भी दिखी सुस्ती आज केवल बैंकिंग ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 0.3 से 0.4 प्रतिशत तक कमजोर रहे। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों की खरीदारी फिलहाल चुनिंदा बड़े आईटी शेयरों तक सीमित रही, जबकि बाकी सेक्टरों में जोखिम लेने की इच्छा कम दिखाई दी। बुधवार की जोरदार तेजी का असर अभी भी कायम गौरतलब है कि एक दिन पहले यानी 29 जुलाई को शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिली थी। उस दिन सेंसेक्स 888.68 अंक यानी 1.16 प्रतिशत की छलांग लगाकर 77,654.60 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी 264.85 अंकों की तेजी के साथ 24,250.20 के स्तर तक पहुंच गया था। उस तेजी की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर की मजबूती रही थी। खासतौर पर इंफोसिस के बेहतर प्रदर्शन और कंपनी के तिमाही नतीजों को लेकर सकारात्मक संकेतों ने पूरे सेक्टर में खरीदारी बढ़ा दी थी। अमेरिकी फेड के फैसले का भी दिखा असर वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर भी बनी रही। फेड ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में राहत का माहौल बना। ब्याज दरों के स्थिर रहने से निवेशकों के बीच अनिश्चितता कुछ हद तक कम हुई और इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी देखने को मिला। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फेड का फैसला ही बाजार की दिशा तय नहीं करेगा। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, वैश्विक महंगाई, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतें भी निवेशकों की रणनीति पर असर डालेंगी। बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन गुरुवार के कारोबारी सत्र में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) करीब 482.75 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह आंकड़ा भारतीय इक्विटी बाजार में निवेशकों की मजबूत भागीदारी और बाजार के आकार को दर्शाता है। आगे बाजार की चाल किस पर रहेगी निर्भर? विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी चार्ट पर बाजार अभी भी मजबूती के संकेत दे रहा है। यदि आईटी सेक्टर में खरीदारी जारी रहती है और बैंकिंग शेयरों में भी सुधार आता है, तो बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम आने वाले कारोबारी सत्रों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचते हुए सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसे किसी भी प्रकार की निवेश सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।