Lucknow Kanpur Expressway: उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंसने और मरम्मत की तस्वीरों के सामने आने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मरम्मत किए जा रहे हिस्से को पंखों की मदद से सुखाते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। एक्सप्रेसवे पर अखिलेश का वार अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल वीडियो शेयर करते हुए तंज कसा और लिखा, "भाजपाई तरक्की की नई हवा"। उन्होंने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का हाल ही में उद्घाटन हुआ हो, अगर उसे कुछ ही दिनों में बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ रही है तो यह निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे की मरम्मत के दौरान सड़क को सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने पूछा कि अगर उद्घाटन के दो-तीन सप्ताह के भीतर ही सड़क की हालत खराब हो रही है तो इस पर तेज रफ्तार से सफर करने का जोखिम कौन उठाएगा। https://twitter.com/yadavakhilesh/status/2085232743164805316 20 दिनों में कई जगह धंसी सड़क करीब 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना पर उद्घाटन के बाद से ही सवाल उठने लगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 20 दिनों के भीतर एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने और सतह खराब होने की शिकायतें सामने आईं। बारिश के बाद कुछ स्थानों पर सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर होने और पानी पहुंचने से स्लिपेज की स्थिति बनी। इसके बाद एनएचएआई ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और कार्रवाई शुरू की। निर्माण कंपनी पर कार्रवाई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी PNC इंफ्राटेक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की तैयारी की जा रही है। इसके अलावा परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को पद से हटाकर उनके मूल विभाग भेज दिया गया है। वहीं पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को आरोपपत्र जारी किया गया है। प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार को भी एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय की परियोजनाओं से दो साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है। IIT खड़गपुर करेगी तकनीकी जांच एनएचएआई ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की समिति गठित की है। इसके अलावा एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांचने के लिए लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। एनएचएआई का कहना है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का खर्च करीब 3 करोड़ रुपये आएगा, जिसे निर्माण कंपनी को ही उठाना होगा। साथ ही मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली भी रोक दी गई है। इस दौरान यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और टोल नुकसान की भरपाई भी निर्माण कंपनी से कराई जाएगी। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे साफ होगा कि एक्सप्रेसवे में आई समस्या की असली वजह निर्माण में कमी थी या फिर बारिश और मिट्टी से जुड़ी तकनीकी समस्या। ये भी पढ़ें: अतीक अहमद के बेटे अबान की सड़क हादसे में मौत, भाई अली से मिलने जा रहा था परिवार