Ali Ahmed Parole: आबान अहमद के अंतिम सफर के बीच परिवार के सदस्य प्रयागराज पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में झांसी जिला जेल में बंद अली अहमद को पैरोल मिलने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच प्रयागराज के लिए रवाना किया गया। अली को जिस वाहन से ले जाया गया, उसकी खिड़कियों पर पर्दे लगाए गए थे। इस वजह से मीडिया कर्मियों को वाहन के अंदर मौजूद अली की स्पष्ट तस्वीर नहीं मिल सकी और न ही उससे बातचीत हो पाई। पर्दों के पीछे रवाना अली अली अहमद की रवानगी की सूचना मिलते ही जेल परिसर के बाहर मीडिया कर्मियों की मौजूदगी बढ़ गई थी। सभी की नजर इस बात पर थी कि जेल से बाहर आने के बाद अली क्या प्रतिक्रिया देता है। हालांकि, वाहन की खिड़कियों पर लगे पर्दों के कारण अली का चेहरा भी कैमरों में साफ नजर नहीं आया। पर्दों के पीछे क्यों रखा गया अली? पैरोल मिलने के बाद अली को निर्धारित प्रक्रिया के तहत झांसी से प्रयागराज ले जाया गया। रास्ते में सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। वाहन के चारों ओर सुरक्षा का इंतजाम किया गया, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। रवानगी के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा वाहन की खिड़कियों पर लगाए गए पर्दों को लेकर रही। मीडिया कर्मी अली से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश करते रहे, लेकिन पर्दों के कारण यह संभव नहीं हो सका। हालांकि, वाहन की खिड़कियों पर पर्दे लगाने के पीछे प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था सुरक्षा कारणों से की गई थी या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण था। प्रयागराज पहुंचा उमर का काफिला इधर, अतीक अहमद के बड़े बेटे मोहम्मद उमर का काफिला प्रयागराज के कसारी-मसारी कब्रिस्तान पहुंच गया। यहां आबान को अंतिम विदाई देने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। उमर के पहुंचने के बाद कब्रिस्तान के बाहर मौजूद भीड़ अचानक बढ़ गई। इसी दौरान गेट पर लगी बैरिकेडिंग टूट गई और बड़ी संख्या में लोग परिसर के अंदर पहुंच गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने मोर्चा संभाला और भीड़ को संभालने की कोशिश की। आबान के अंतिम सफर के बीच अली की पैरोल पर रिहाई, पर्दों से ढका वाहन और उमर की प्रयागराज में मौजूदगी ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ प्रशासन की तैयारियों पर भी लोगों का ध्यान खींचा है। ये भी पढ़ें: भाई की आखिरी रस्म में शामिल होंगे अली-उमर! हाईकोर्ट ने पैरोल दी