US Russia Sanctions Bill: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिकी सीनेट ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों वाले एक नए विधेयक को 86-11 वोटों से मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव में रूस के प्रमुख तेल और गैस खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100% शुल्क लागू हो गया है। विधेयक को अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की मंजूरी और आगे की कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके बाद ही इसके प्रावधान लागू होने की स्थिति बनेगी। भारत पर क्यों है नजर? भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। नए विधेयक में रूस के कच्चे तेल और गैस के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर अधिकतम 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत और चीन इस संभावित दायरे में बताए जा रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के बीच मॉस्को को मिलने वाले आर्थिक संसाधनों को सीमित करना है। विधेयक में रूस से जुड़े अधिकारियों, कारोबारियों, बैंकों और उसकी ‘शैडो फ्लीट’ के खिलाफ भी प्रतिबंधों का प्रस्ताव है। पहले 500% टैरिफ की थी चर्चा रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ अमेरिकी प्रस्ताव पहले इससे भी ज्यादा सख्त था। 2025 में पेश किए गए शुरुआती प्रस्ताव में 500% तक टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। बाद के संशोधित विधेयक में प्रमुख रूसी तेल-गैस खरीदारों के लिए अधिकतम सीमा 100% कर दी गई। भारत के लिए आगे क्या? फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि सीनेट की मंजूरी अपने आप भारत पर नया टैरिफ लागू नहीं करती। विधेयक को प्रतिनिधि सभा से भी पारित होना होगा। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन यह तय करेगा कि प्रावधानों का इस्तेमाल किस तरह और किन देशों पर किया जाए। ऐसे में भारत के लिए आने वाले दिनों में रूसी तेल खरीद, अमेरिकी व्यापार और संभावित टैरिफ के बीच संतुलन एक अहम आर्थिक और कूटनीतिक मुद्दा बन सकता है। ये भी पढ़ें: थाईलैंड के स्कूल में फायरिंग से मचा हड़कंप! छह की मौत, कई घायल