10 अगस्त 2026, सोमवार — हफ्ते के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में सुस्त लेकिन सकारात्मक शुरुआत देखने को मिली। मजबूत वैश्विक संकेतों के बावजूद निवेशक सतर्क नजर आए और बेंचमार्क इंडेक्स सीमित दायरे में इधर-उधर डोलते रहे। कैसा रहा बाजार का हाल पिछले सत्र में सेंसेक्स 78,499.17 पर बंद हुआ था, और आज कारोबार की शुरुआत महज 2.42 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 78,501.59 पर हुई। निफ्टी भी 10.6 अंक चढ़कर 24,581.25 पर खुला, जबकि पिछला बंद स्तर 24,570.65 था। दोपहर के कारोबार तक सेंसेक्स करीब 78,542 के आसपास और निफ्टी 24,500 के ऊपर टिका रहा, यानी बढ़त बहुत मामूली — करीब 0.06 फीसदी — ही रही। दिलचस्प बात यह रही कि जहां बड़े इंडेक्स हल्की बढ़त में रहे, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव दिखा। बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स करीब 3.85 अंक और स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 0.07 फीसदी की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। बैंकिंग शेयरों में भी हल्की सुस्ती रही, बीएसई बैंकेक्स करीब 0.28 फीसदी फिसला और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज भी हल्की नरमी के साथ कारोबार करता दिखा। टाइटन-आईसीआईसीआई की चमक, बजाज फाइनेंस पर दबाव सेंसेक्स के 30 शेयरों में टाइटन आज सबसे आगे रहा और करीब 1 फीसदी की छलांग लगाई। इसके अलावा आईसीआईसीआई बैंक, एचसीएल टेक, इंफोसिस और एसबीआईएन भी बढ़त बनाने वालों में शामिल रहे। दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा और करीब 1 फीसदी लुढ़का। भारती एयरटेल, एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंडिगो भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। एफआईआई-डीआईआई और ग्लोबल संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने पिछले सत्र में करीब 480 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 235 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे — यानी दोनों तरफ से खरीदारी का माहौल बना रहा। अमेरिका में जुलाई के कमजोर रोजगार आंकड़ों ने फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी को लेकर चिंता कुछ कम की है, जिसका असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। जापान का निक्केई करीब 2 फीसदी की जोरदार छलांग के साथ कारोबार कर रहा था, हालांकि हांगकांग का हैंगसेंग हल्की गिरावट में रहा। रुपया और कच्चा तेल बने चिंता की वजह घरेलू मोर्चे पर रुपये पर दबाव साफ दिखा। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 8 पैसे कमजोर होकर 95.25 के स्तर पर आ गया। इसकी सीधी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है — स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता के चलते ब्रेंट क्रूड 84 डॉलर के ऊपर और डब्ल्यूटीआई करीब 79 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। तेल आयात पर भारी निर्भरता वाले भारत के लिए महंगा कच्चा तेल आयात बिल और महंगाई दोनों मोर्चों पर चुनौती बन सकता है। आगे क्या जब तक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति साफ नहीं होती, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बाजार की चाल तय करता रहेगा। एनर्जी शेयरों जैसे ONGC और ऑयल इंडिया को महंगे कच्चे तेल का फायदा मिल सकता है, जबकि एविएशन, पेंट और केमिकल जैसे तेल पर निर्भर सेक्टरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों की नजर अब आगे आने वाले वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और फेड के रुख पर टिकी रहेगी। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, कृपया निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लें। आपकी नजर में आज किस सेक्टर पर दांव लगाना समझदारी होगी — एनर्जी या आईटी? कमेंट में बताइए।