Cabinet Decisions: देश की रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने करीब 13,041 करोड़ रुपये की लागत वाली कई रेल और सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का मकसद परिवहन क्षमता बढ़ाने, यात्रा समय घटाने और माल ढुलाई को आसान बनाना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रस्तावित परियोजनाएं देश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में कनेक्टिविटी को नई गति देंगी। इसके साथ ही बिहार में एक अहम चार-लेन सड़क परियोजना को भी मंजूरी दी गई है। रेल नेटवर्क में होंगे बड़े बदलाव सरकार ने कई व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त ट्रैक बिछाने की योजना को मंजूरी दी है। इससे मौजूदा रेल लाइनों की क्षमता बढ़ेगी और यात्री व मालगाड़ियों के संचालन में आसानी होगी। खड़गपुर-भद्रक (रणिताल) चौथी लाइन: करीब ₹3,352 करोड़ की लागत से विकसित होगी। भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन: इस परियोजना पर लगभग ₹1,583 करोड़ खर्च होंगे। गुम्मडिपूंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन: दक्षिण भारत की रेल क्षमता बढ़ाने वाली इस योजना पर करीब ₹2,229 करोड़ खर्च किए जाएंगे। कटक-पारादीप तीसरी और चौथी लाइन: लगभग ₹2,286 करोड़ की यह परियोजना ओडिशा के औद्योगिक और बंदरगाह क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अतिरिक्त रेल लाइनों से ट्रेनों के संचालन के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध होगी। साथ ही मालगाड़ियों की आवाजाही बेहतर होने से औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। बिहार में बनेगा नया चार-लेन कॉरिडोर रेल परियोजनाओं के साथ सड़क क्षेत्र में भी बड़ा निवेश किया गया है। बिहार में मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा तक चार-लेन हाईवे के निर्माण को मंजूरी मिली है। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹3,591 करोड़ है। इसके पूरा होने पर क्षेत्रीय सड़क संपर्क मजबूत होगा। स्थानीय व्यापार, पर्यटन और माल परिवहन को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। ₹13 हजार करोड़ से ज्यादा निवेश क्यों अहम? इन सभी परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹13,041 करोड़ से अधिक है। सरकार के मुताबिक, इससे न सिर्फ परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा, बल्कि निर्माण गतिविधियों के दौरान रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। रेल और सड़क दोनों क्षेत्रों में क्षमता बढ़ने से माल की आवाजाही तेज हो सकती है और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत घटाने में मदद मिल सकती है। ये परियोजनाएं देश के व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर और गति शक्ति विजन के अनुरूप बताई जा रही हैं। अब असली चुनौती समय पर पूरा करना परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के बाद अगली चुनौती इन्हें निर्धारित समय में पूरा करने की होगी। यदि निर्माण कार्य समय पर पूरे होते हैं, तो यात्रियों के साथ उद्योग, व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी सीधा लाभ मिलेगा। यानी कैबिनेट का यह फैसला सिर्फ नए ट्रैक और हाईवे बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के परिवहन नेटवर्क की क्षमता बढ़ाकर आर्थिक गतिविधियों को तेज करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।