Hamirpur Maudaha Dam: हमीरपुर के मौदहा बांध यानी ब्रह्मानंद बांध की बदहाली ने करोड़ों रुपये के मरम्मत कार्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बांध के छह फाटक बंद कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी में घंटों मशक्कत की गई, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। फाटक खुले रहने से लगातार पानी बहकर बर्बाद होता रहा। वहीं ग्रामीणों ने बांध के मरम्मत कार्य में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। बांध के फाटक नहीं हुए बंद मौदहा बांध में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब बांध के छह फाटक बंद कराने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। फाटक बंद कराने के लिए सायरन भी बजता रहा, लेकिन इसके बावजूद फाटक बंद नहीं हो सके। आरोप है कि बांध की मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन मरम्मत कार्य की जमीनी हकीकत अब सामने आ गई है। उनका कहना है कि अगर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी बांध के फाटक सही तरीके से संचालित नहीं हो पा रहे हैं, तो मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है। फाटकों से पानी की बर्बादी छह फाटक खुले रहने से लगातार पानी बहकर बर्बाद होता रहा। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर बारिश के बीच बांध में पानी का दबाव बढ़ता है और बाढ़ जैसी स्थिति बनती है, तो किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी। ग्रामीणों ने मौदहा बांध के मरम्मत कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल छह फाटकों के बंद न होने और पानी की बर्बादी को लेकर विभागीय व्यवस्था सवालों के घेरे में है। ये भी पढ़ें: सड़क बने बिना नहीं लौटेंगे… हमीरपुर में बच्चों का अनोखा आंदोलन