उत्तर प्रदेश

एक-एक पैसा सीधे तिजोरी में जाएगा… बांके बिहारी मंदिर के दान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर के दान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हुआ। कोर्ट ने हर दान राशि दानपात्र या ऑनलाइन खाते में जमा करने और पारदर्शी व्यवस्था के निर्देश दिए।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Banke Bihari Donation: ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में दान की रकम को लेकर सामने आए आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मंदिर में आने वाला दान निर्धारित दानपात्र या ऑनलाइन माध्यम से सीधे मंदिर के खाते/तिजोरी तक पहुंचना चाहिए। दान की रकम के संचालन में किसी भी तरह की अनियमितता या बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त पीठ

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को मंदिर की प्रबंधन समिति से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

दान में हेराफेरी के आरोपों पर सुनवाई

सुनवाई के दौरान मंदिर में कथित चंदा चोरी से जुड़ी हाई पावर कमेटी की स्टेटस रिपोर्ट अदालत के सामने रखी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने रिपोर्ट के साथ कुछ तस्वीरें और वीडियो का हवाला देते हुए मामले को गंभीर बताया। अदालत को बताया गया कि एक वीडियो में कुछ लोग मंदिर की गोलक के सामने खड़े होकर श्रद्धालुओं से नकद राशि लेते और उसे अपनी थैलियों में रखते दिखाई दे रहे हैं। इन दावों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के दान की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।

कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया हर दान निर्धारित दानपात्र या ऑनलाइन खाते के माध्यम से सीधे मंदिर की व्यवस्था में जमा होना चाहिए। सेवायत या कोई अन्य व्यक्ति इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डाल सकता। अदालत ने प्रबंधन समिति को दान की रकम के संग्रह और प्रबंधन के लिए ऐसी पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने को कहा, जिससे पैसों की हेराफेरी की किसी भी संभावना को रोका जा सके।

मंदिर की रकम से संपत्ति खरीदने पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की धनराशि से संपत्ति खरीदने से जुड़े प्रस्तावों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे प्रस्तावों को लेन-देन पूरा होने से पहले उसके सामने रखा जाए। इससे मंदिर की संपत्ति और दान की रकम के इस्तेमाल पर न्यायिक निगरानी बनी रहेगी। अदालत के निर्देशों का मकसद दान की रकम के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाना और श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना है। अब मंदिर प्रबंधन समिति को अदालत के निर्देशों के अनुरूप दान संग्रह और वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने होंगे।

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