25 अगस्त 2026 मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का रुख देखने को मिला। सोमवार के मुकाबले सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में खुले और दिनभर दबाव में कारोबार करते नजर आए। पिछले सत्र में सेंसेक्स 77,369.11 और निफ्टी 24,219.05 के स्तर पर बंद हुआ था। आज बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 74 अंक टूटकर 77,295 के आसपास आ गया, जबकि निफ्टी 24,180 के नीचे फिसल गया। सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और सेंसेक्स करीब 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,230-77,300 के दायरे में कारोबार करता दिखा। गिरावट की वजह क्या रही आज की सुस्ती के पीछे कई कारण गिनाए जा रहे हैं। सबसे बड़ी वजह ईरान पर अमेरिका के नए और सख्त प्रतिबंधों को लेकर बढ़ी अनिश्चितता रही, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की आशंका गहरा गई। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा और ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना रहा, जो भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए चिंता की बात है। इसके अलावा अमेरिकी बाजार में टेक और सेमीकंडक्टर शेयरों में हुई तगड़ी बिकवाली का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखा। हांगकांग का हैंगसेंग नीचे रहा, हालांकि जापान का निक्केई मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। घरेलू मोर्चे पर, निफ्टी डेरिवेटिव्स का यह पहला मासिक एक्सपायरी था जो नए क्लोजिंग-ऑक्शन सिस्टम के तहत हुआ, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की उम्मीद पहले से ही जताई जा रही थी। सेक्टोरल मोर्चे पर भी कमजोरी हावी रही — कुल 16 प्रमुख सेक्टरों में से 14 लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जिससे बाजार की चौड़ाई (ब्रेड्थ) कमजोर बनी रही। किन शेयरों में हलचल शुरुआती कारोबार में TCS, टाटा स्टील, इटरनल, अडाणी पोर्ट्स और टाइटन जैसे शेयर बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे, जिसमें TCS करीब 0.80 प्रतिशत की मजबूती के साथ आगे रहा। वहीं दूसरी ओर बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे दिग्गज शेयरों पर दबाव देखा गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी हल्की गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख आंकड़ों के मुताबिक, 24 अगस्त को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 1,181.66 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी 2,493.41 करोड़ रुपये की खरीदारी की। दिलचस्प बात यह है कि गिरावट के बावजूद अगस्त महीने में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार में 2.5 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है, जो ऊंची तेल कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच बाजार को कुछ हद तक सहारा दे रहा है। आगे की राह निवेशकों की नजर अब एनवीडिया के तिमाही नतीजों और जैक्सन होल सिम्पोजियम पर टिकी है, जहां फेडरल रिजर्व प्रमुख केविन वॉर्श के बयान से ब्याज दरों की दिशा को लेकर संकेत मिल सकते हैं। अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल आने वाले सत्रों में भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, कृपया निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। आपकी राय में आज की गिरावट अस्थायी है या आने वाले दिनों में बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है? कमेंट में जरूर बताएं।