उत्तर प्रदेश

10 दिन में फिर दरारें! उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के पैचवर्क के बाद भी नहीं थमी परेशानी

उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के पैचवर्क वाले हिस्से में 10 दिन बाद फिर चौड़ी दरारें दिखीं। भारी बारिश के बीच सड़क की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ganga Expressway: उत्तर प्रदेश के उन्नाव में गंगा एक्सप्रेसवे के मरम्मत किए गए हिस्से पर एक बार फिर बड़ी दरारें दिखाई देने से निर्माण गुणवत्ता और सड़क की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हाल की भारी बारिश के बाद एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में कटाव, धंसाव और गड्ढे बनने की शिकायतें आ चुकी हैं।

बारिश से सड़क फिर क्षतिग्रस्त

ताजा मामला उन्नाव के आसपास का बताया जा रहा है। यहां पहले क्षतिग्रस्त हुए हिस्से पर पैचवर्क कराया गया था, लेकिन अब उसी मरम्मत वाले क्षेत्र में चौड़ी दरारें उभर आई हैं। लगातार बारिश के कारण मिट्टी की पकड़ कमजोर होने और पानी के बहाव का असर सड़क के ढांचे पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कुछ दिन पहले मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर किलोमीटर 421 के पास भी सड़क और एम्बैंकमेंट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। भारी बारिश के बाद वहां करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने की सूचना सामने आई थी। बताया गया कि बारिश के पानी के तेज बहाव से सड़क के किनारे की मिट्टी कट गई और ढांचे को नुकसान पहुंचा। इसके बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, यानी यूपीईडा, की टीम ने मौके पर पहुंचकर मरम्मत शुरू कराई थी।

पैचवर्क पर फिर उठे सवाल

इससे पहले जुलाई में उन्नाव के सोनिक टोल प्लाजा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली करीब सात मीटर लंबी एप्रोच रोड भी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी। उस समय एम्बैंकमेंट की मिट्टी बहने से सड़क का हिस्सा धंस गया था। अब पैचवर्क में दोबारा आई दरारों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल अस्थायी मरम्मत से समस्या का समाधान संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे लगभग 594 किलोमीटर लंबा और छह लेन वाला एक्सेस-कंट्रोल मार्ग है, जो मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना 12 जिलों से होकर गुजरती है और इसे प्रदेश के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में गिना जाता है। इसका उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को हुआ था।

स्थायी मरम्मत की जरूरत

उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद सड़क के विभिन्न हिस्सों में नुकसान की खबरों ने ड्रेनेज डिजाइन, मिट्टी भराव, एम्बैंकमेंट की स्थिरता और निर्माण मानकों पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञ जांच से ही स्पष्ट होगा कि दरारों की वजह असाधारण बारिश, जल-निकासी की कमी या निर्माण से जुड़ी कोई तकनीकी खामी है। फिलहाल जरूरत ऐसी स्थायी मरम्मत की है, जो अगली बारिश में फिर न टूटे।

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