उत्तर प्रदेशनोएडा

नोएडा में बंदरों का आतंक या वन्यजीव प्रबंधन की नाकामी?

विशेषज्ञों ने बेहतर कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक आवास संरक्षण और वन्यजीवों से दूरी की सलाह दी। लंगूर रखना कानूनी समाधान नहीं, इसलिए वैज्ञानिक उपाय जरूरी हैं।

Noida News: नोएडा के सेक्टर-144 की गुलशन बोटानिया सोसायटी में बंदरों का आतंक लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। बंदर घरों में घुसकर खाना उठा रहे हैं और सामान को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई निवासियों ने सुरक्षा के लिए अपनी बालकनी और खिड़कियों पर जालियां लगा दी हैं।

बंदरों का बढ़ता आतंक

सोसायटी की निवासी सौम्या जब यात्रा से लौटीं तो उनका घर बिखरा हुआ था। सीसीटीवी में बंदरों को बालकनी की खिड़की से घर में घुसते देखा गया। वहीं, सोसायटी के सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुप पर भी बंदरों से हुए नुकसान की तस्वीरें और वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं। निवासियों ने वन विभाग, नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन से कई बार शिकायत की है। कुछ लोगों ने निजी बंदर पकड़ने वालों की मदद भी ली, लेकिन उनका कहना है कि बंदर कुछ समय बाद फिर वापस आ जाते हैं।

समस्या का दूसरा पहलू

लेकिन क्या यह सिर्फ बंदरों का आतंक है? वन्यजीव प्रबंधन के नजरिए से देखें तो शहरों का तेजी से विस्तार, प्राकृतिक आवास में कमी, खुले कचरे और इंसानों द्वारा बंदरों को खाना खिलाना भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। नोएडा प्राधिकरण ने बंदरों को पकड़कर संरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के लिए निजी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, सवाल यह है कि क्या सिर्फ बंदरों को पकड़कर दूसरी जगह छोड़ना इसका स्थायी समाधान है?

लंगूर रखना कानूनी नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक बेहतर कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक आवास का संरक्षण और इंसानों-वन्यजीवों के बीच दूरी बनाए रखना भी जरूरी है। कुछ निवासियों ने बंदरों को दूर रखने के लिए सोसायटी में लंगूर रखने का सुझाव दिया, लेकिन वन्यजीवों को निजी तौर पर रखना कानूनी समाधान नहीं है।

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