Delhi Heatwave || Heat Stroke || Ice Bath Treatment || Heat Stroke vs Heat Exhaustion: दिल्ली में भीषण गर्मी अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि जानलेवा खतरे में बदलती दिखाई दे रही है। राजधानी में हीट स्ट्रोक के लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में पश्चिम बंगाल से दिल्ली आए 24 वर्षीय छात्र की हालत ने डॉक्टरों को भी अलर्ट कर दिया। छात्र का शरीर का तापमान 105 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया था और उसे गंभीर हालत में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। 15 से 20 मिनट तक बर्फ से भरे टब में रखा डॉक्टरों के मुताबिक छात्र ट्रेन के जनरल कोच में सफर कर रहा था, जहां अत्यधिक भीड़, उमस और पानी की कमी ने उसकी हालत बिगाड़ दी। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे तुरंत बर्फ से भरे टब में रखा। करीब 15 से 20 मिनट तक चली इस प्रक्रिया के बाद शरीर का तापमान नियंत्रित किया जा सका। फिलहाल मरीज ICU में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है। दिमाग, किडनी और दिल पर खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि हीट स्ट्रोक सामान्य लू नहीं, बल्कि मेडिकल इमरजेंसी होती है। जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, तब दिमाग, किडनी और दिल जैसे अंग प्रभावित होने लगते हैं। मरीज को चक्कर, उलझन, बेहोशी, तेज सांस, उल्टी और दौरे तक पड़ सकते हैं। क्या जरुरी है बर्फ का टब RML अस्पताल में ही एक और गंभीर मामला सामने आया, जहां करीब 50 वर्षीय व्यक्ति को बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उसे भी तुरंत बर्फ के टब में रखकर शरीर का तापमान कम किया। डॉक्टर इस प्रक्रिया को “रेपिड कूलिंग टेक्नीक” बताते हैं, जो शरीर को तेजी से ठंडा कर अंगों को नुकसान से बचाने में मदद करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से दोपहर की धूप से बचने, लगातार पानी पीने और लक्षण दिखते ही तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है। ये भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में 3 दिन का चक्का जाम, ऑटो-टैक्सी हड़ताल से राजधानी ठप!