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29 जून 2026 के लिए स्टॉक एनालिसिस

Reported by Tanvi Pandey and edited by Tanvi Pandey

आज सेंसेक्स-निफ्टी की चाल तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर

मुहर्रम की छुट्टी के बाद खुलेगा बाजार, सेंसेक्स की मासिक एक्सपायरी, ग्लोबल संकेत और विदेशी निवेशकों की रणनीति पर टिकी निवेशकों की नजर।

भारतीय शेयर बाजार में नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत बेहद अहम मानी जा रही है।

मुहर्रम की छुट्टी के कारण शुक्रवार को बाजार बंद रहने के बाद सोमवार को निवेशकों की वापसी हो रही है। ऐसे में घरेलू बाजार को तीन दिनों के दौरान वैश्विक स्तर पर हुई तमाम आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं का असर एक साथ झेलना होगा। यही वजह है कि बाजार में फिलहाल उत्साह से ज्यादा सतर्कता का माहौल दिखाई दे रहा है।

बीते कारोबारी सत्र में भारतीय बाजार ने मजबूती जरूर दिखाई थी, लेकिन निवेशकों ने लंबी छुट्टी से पहले मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। यही कारण रहा कि दिनभर अच्छी बढ़त के बावजूद बाजार सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ। अब सोमवार का कारोबार इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि सप्ताहांत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए घटनाक्रमों को बाजार किस तरह से स्वीकार करता है।


छुट्टी से पहले कैसी रही बाजार की चाल?

गुरुवार के कारोबारी सत्र में बीएसई सेंसेक्स करीब 109 अंकों की बढ़त के साथ 77,100 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं, निफ्टी 50 भी लगभग 34 अंक मजबूत होकर 24,056 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख सूचकांकों ने ऊंचे स्तर छुए, लेकिन लंबी छुट्टी को देखते हुए निवेशकों ने जोखिम कम करना बेहतर समझा और कई शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली।

इस दौरान बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में अच्छी खरीदारी रही। वहीं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और मेटल सेक्टर के शेयर दबाव में नजर आए। ऑटो कंपनियों और कुछ बड़े बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सहारा दिया, जबकि टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम से जुड़े शेयरों में कमजोरी रही।

तीन दिनों तक बाजार बंद रहने के कारण अब निवेशकों को एक साथ कई वैश्विक संकेतों का आकलन करना होगा। सबसे बड़ी नजर अमेरिका और ईरान के बीच सप्ताहांत में हुई वार्ता पर रहेगी। यदि दोनों देशों के बीच सकारात्मक सहमति की खबरें मजबूत होती हैं तो वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की भावना बढ़ सकती है। इसका सीधा फायदा भारतीय बाजार को भी मिल सकता है।

इसके विपरीत यदि बातचीत से कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता या तनाव दोबारा बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे हालात में बाजार पर दबाव बढ़ने की संभावना रहेगी।

इसके अलावा शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों की चाल और सोमवार सुबह एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी भारतीय निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा, क्योंकि इन सभी घटनाओं पर भारतीय बाजार की प्रतिक्रिया अभी बाकी है।


शुरुआती कारोबार में रह सकती है सुस्ती

सोमवार सुबह उपलब्ध शुरुआती संकेत बताते हैं कि बाजार की शुरुआत हल्की कमजोरी के साथ हो सकती है। हालांकि यह गिरावट बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन निवेशकों का रुख फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार और निगरानी वाला बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सकारात्मक वैश्विक संकेत मिले तो निफ्टी 24,200 के स्तर को पार करने की कोशिश कर सकता है। वहीं नकारात्मक परिस्थितियों में 23,950 का स्तर बाजार के लिए महत्वपूर्ण सपोर्ट साबित होगा।

आज का सबसे बड़ा इवेंट- सेंसेक्स की मासिक एक्सपायरी

सोमवार के कारोबार की सबसे महत्वपूर्ण घटना बीएसई सेंसेक्स की मासिक ऑप्शंस एक्सपायरी है। आमतौर पर एक्सपायरी वाले दिन बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहता है।

विशेष रूप से दोपहर 2 बजे से लेकर बाजार बंद होने तक बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इस दौरान बैंकिंग और अन्य बड़े ब्लूचिप शेयरों में तेज खरीद-बिक्री होने की संभावना रहती है। बाजार विशेषज्ञ खुदरा निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि इस समय जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने से बचें और यदि कोई ऑर्डर देना हो तो मार्केट ऑर्डर की बजाय लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करें।

किन स्तरों पर रहेगी बाजार की नजर?

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,950 का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। यदि बाजार इस स्तर के ऊपर बना रहता है तो तेजी की उम्मीद कायम रह सकती है। दूसरी ओर 24,200 का स्तर फिलहाल सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। इस स्तर के ऊपर मजबूती के साथ टिकने पर बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है।

सेंसेक्स के लिए 77,000 से 77,200 का दायरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मासिक एक्सपायरी के कारण इसी दायरे में सबसे अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


निवेशकों को राहत दे रहा है VIX

बाजार की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX हाल के सप्ताहों के निचले स्तर पर बना हुआ है। यह संकेत देता है कि फिलहाल बाजार में घबराहट का माहौल नहीं है। हालांकि यदि कोई बड़ा वैश्विक घटनाक्रम सामने आता है तो स्थिति तेजी से बदल भी सकती है। इसलिए निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक रणनीति अपनाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

विदेशी और घरेलू निवेशकों की अलग-अलग रणनीति

संस्थागत निवेशकों के आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सीमित खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बड़े पैमाने पर निवेश जारी रखा।

पूरे वर्ष 2026 के दौरान विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर कई बार बाजार पर देखने को मिला है, लेकिन घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी ने भारतीय बाजार को मजबूती प्रदान की है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय शेयर बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है।


इन कंपनियों के शेयरों पर रहेगी खास नजर

आज के कारोबार में कुछ बड़ी कंपनियां भी निवेशकों के रडार पर रहेंगी। बिजली क्षेत्र की दो प्रमुख वित्तीय कंपनियों के विलय की घोषणा के बाद इस सेक्टर में गतिविधियां बढ़ सकती हैं। यदि यह विलय सफल रहता है तो देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंसिंग संस्थाओं में से एक का गठन होगा।

इसके अलावा निजी बैंकिंग क्षेत्र की एक प्रमुख बैंक में शीर्ष नेतृत्व से जुड़े बदलाव की घोषणा भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। बड़े बैंकों में नेतृत्व परिवर्तन अक्सर शेयरों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का कारण बनते हैं, इसलिए निवेशकों की नजर प्रबंधन की आगामी रणनीति पर बनी रहेगी।


क्या करें निवेशक?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना बेहतर होगा। वैश्विक घटनाक्रम, मासिक एक्सपायरी और तकनीकी स्तरों को देखते हुए बाजार में दिनभर तेज उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक मजबूत कंपनियों पर नजर बनाए रखें, जबकि इंट्राडे ट्रेडर्स को जोखिम प्रबंधन के साथ ही कारोबार करना चाहिए। यदि वैश्विक माहौल सकारात्मक बना रहता है तो सप्ताह के दूसरे हिस्से में बाजार एक नई दिशा पकड़ सकता है।

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