Ram Mandir: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम और गहनों की कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नाम शामिल नहीं हैं। मामले में नामजद किए गए अन्य आठ आरोपी पहले से ही जेल में हैं। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने SIT की रिपोर्ट राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास को सौंप दी है। अब इस रिपोर्ट को ट्रस्ट की 2 सितंबर को प्रस्तावित बैठक में रखा जाएगा। इसी बैठक में रिपोर्ट के निष्कर्षों और आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा होने की संभावना है। जून में सामने आया था चढ़ावे की रकम चोरी का मामला राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान नोटों और आभूषणों की कथित चोरी का मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT गठित की थी। लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में बनाई गई इस टीम में IG रेंज किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को शामिल किया गया था। SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इसके दो दिन बाद, 25 जून को राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। FIR में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू सहित कुल आठ लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने मामला दर्ज होने के कुछ ही समय बाद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। आठ आरोपियों पर चढ़ावा गिनते समय चोरी का आरोप जांच के दौरान आरोप लगाया गया कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान नोटों और गहनों की चोरी की गई। FIR में शामिल आठों आरोपी इस समय फैजाबाद जेल में बंद बताए जा रहे हैं। वहीं, ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के नाम FIR में शामिल नहीं किए गए थे। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। इसके साथ ही गोपाल नागरकट्टे को स्पेशल इनवाइटी की सूची से हटाने का फैसला भी लिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जांच का स्वरूप बदला मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चार अलग-अलग याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं। इनमें जांच CBI को सौंपने और मंदिर में चढ़ावे तथा दान के प्रबंधन की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने जैसी मांगें की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच के लिए नई SIT का गठन किया गया। 20 जुलाई को बनाई गई नई टीम में लखनऊ रेंज के IG किरण एस, DIG अयोध्या सोमेन वर्मा और अयोध्या के SSP गौरव ग्रोवर को शामिल किया गया। नई SIT को जांच की प्रगति से सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराना है। सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट मांग चुका है सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि जांच से जुड़ी रिपोर्ट ऐसे लोगों को नहीं दी जा सकती, जो सीधे जांच का हिस्सा नहीं हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SIT का गठन अदालत के निर्देश पर हुआ है और वह अदालत के प्रति जवाबदेह है। अदालत ने SIT को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने को कहा था। रिपोर्ट को पहले सुप्रीम कोर्ट देखेगा और उसके बाद यह तय किया जाएगा कि इसे मामले से जुड़े अन्य पक्षों के साथ साझा किया जाए या नहीं। अब SIT की अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद सबकी नजर 2 सितंबर को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर है। बैठक में रिपोर्ट के निष्कर्षों पर चर्चा और आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सकता है। ये भी पढ़ें : प्रयागराज में वंदे भारत पर पथराव, कई शीशे टूटे; काली टीशर्ट पहने शख्स की तलाश तेज