अयोध्याउत्तर प्रदेश

राम मंदिर ट्रस्ट में नए महासचिव की एंट्री, चढ़ावा विवाद के बाद चंपत राय का इस्तीफा मंजूर

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट ने चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया। ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने का भरोसा दिया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Ram Mandir Trust Meeting: उत्तर प्रदेश के अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। इसके साथ ही सेवानिवृत्त भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

तीन घंटे मंथन

चढ़ावा विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट की यह पहली अहम बैठक थी, जो करीब तीन घंटे तक चली। बैठक में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मामले की गंभीरता पर चर्चा की और भविष्य की कार्ययोजना तय की। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय ने स्वयं कहा था कि जब तक इस मामले के सभी तथ्य स्पष्ट नहीं हो जाते और आरोपी कानून के दायरे में नहीं आते, तब तक उनके लिए पद पर बने रहना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया।

संविधान अनुसार फैसला

बैठक में शामिल ट्रस्ट सदस्य के. पाराशरन ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के संविधान के अनुसार यदि कोई पदाधिकारी त्यागपत्र देता है तो उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया निर्धारित है। उसी नियम के तहत यह निर्णय लिया गया। ट्रस्ट की अगली बैठक 22 जुलाई को प्रस्तावित है, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

विश्वास बहाली की चुनौती

नवनियुक्त कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने पदभार संभालने के बाद कहा कि चढ़ावा विवाद से श्रद्धालुओं के विश्वास को ठेस पहुंची है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रबंधन में जिन कमियों का फायदा उठाया गया, उन्हें दूर कर व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

बैठक के दौरान ट्रस्ट ने उन सोने-चांदी की वस्तुओं को भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया, जिनकी चोरी होने का दावा किया जा रहा था। ट्रस्ट का कहना है कि सभी बहुमूल्य भेंटों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाता है और समय-समय पर उनका भौतिक सत्यापन भी कराया जाता है।

दान का पूरा हिसाब

ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार स्थापना से अब तक उसे दान और चढ़ावे के रूप में हजारों करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इनमें बड़ी राशि मंदिर निर्माण, विकास कार्यों और संचालन संबंधी गतिविधियों पर खर्च की जा चुकी है। ट्रस्ट का दावा है कि सभी वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित है और आवश्यकता पड़ने पर श्रद्धालु भी संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं का विश्वास दोबारा मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाने का संकेत दिया है। अब सभी की नजरें जांच के नतीजों और आगामी ट्रस्ट बैठक पर टिकी हैं।

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