Workers In UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिकों के हित में कई अहम फैसले लिए हैं। मंगलवार को कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्यदशा नियमावली-2026 और उत्तर प्रदेश सामाजिक सुरक्षा नियमावली-2026 को मंजूरी दे दी। नई व्यवस्था के तहत श्रमिकों को नियुक्ति पत्र, नियमित स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई अधिकार मिलेंगे। एक साल की सेवा पर ग्रेच्युटी नई सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव तय अवधि वाले पात्र कर्मचारियों के लिए है। अब तीन साल के बजाय एक साल की सेवा पूरी करने पर ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा। इसके दायरे में नियमित कर्मचारियों के साथ गिग, प्लेटफॉर्म, असंगठित और स्व-नियोजित श्रमिकों को भी शामिल किया गया है। नियुक्ति पत्र देना होगा अनिवार्य प्रदेश में सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र देना जरूरी होगा। इसके अलावा नियोक्ता के खर्च पर साल में कम से कम एक बार कर्मचारियों की निशुल्क स्वास्थ्य जांच करानी होगी। ईपीएफ और ईएसआई जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा भी बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट का रास्ता साफ महिला कर्मचारी अपनी सहमति से सभी तरह के प्रतिष्ठानों में रात्रिकालीन ड्यूटी कर सकेंगी। हालांकि, इसके लिए नियोक्ताओं को सुरक्षित परिवहन, सुरक्षा और अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। मातृत्व लाभ से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा का भी प्रावधान किया गया है। कार्यस्थल पर सुविधाएं होंगी जरूरी नई नियमावली के तहत काम के घंटे, विश्राम, मजदूरी और अवकाश से जुड़े प्रावधानों के साथ कार्यस्थल पर पेयजल, शौचालय, स्नानघर, विश्राम कक्ष, कैंटीन और प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी होगा। गंभीर दुर्घटना या व्यावसायिक खतरे की जानकारी संबंधित अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। पंजीकरण व्यवस्था होगी आसान नियोक्ताओं को अलग-अलग कानूनों के तहत अलग-अलग पंजीकरण कराने की परेशानी से राहत मिलेगी। प्रतिष्ठानों के लिए एकल पंजीकरण और ठेका श्रमिकों व अंतरराज्यीय प्रवासी कर्मकारों समेत विभिन्न श्रेणियों के लिए एकीकृत व्यवस्था लागू होगी। पंजीकरण और अभिलेख इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा किए जा सकेंगे। निर्माण श्रमिकों के लिए भी बदलाव भवन एवं अन्य सन्निर्माण श्रमिकों के लिए उपकर निर्धारण में आवासीय भवन निर्माण की लागत सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। रोजगार के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर श्रमिक या पात्र आश्रितों को सामाजिक सुरक्षा लाभ देने का भी प्रावधान किया गया है। ये भी पढ़ें: स्वाइन फ्लू ने बढ़ाई चिंता, उत्तराखंड में 49 मामले, 5 की मौत