PGI Hospital Noida: नोएडा के PGI अस्पताल से सामने आई तस्वीरों ने मेंटेनेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के बेसमेंट में जगह-जगह पानी टपकता नजर आ रहा है। कई हिस्सों में पानी जमा है, जबकि आसपास कूड़ा और कबाड़ भी पड़ा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि बेसमेंट में कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल बताया जा रहा है। बेसमेंट में पानी अस्पताल के बेसमेंट में कई स्थानों पर छत और अन्य हिस्सों से लगातार पानी रिसने की बात सामने आई है। कहीं फर्श पर पानी जमा है तो कहीं गंदगी और कबाड़ दिखाई दे रहा है। इससे न केवल साफ-सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि अस्पताल की बिल्डिंग के रखरखाव को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ा सवाल उस कंपनी की कार्यप्रणाली पर है, जिसे अस्पताल की मेंटेनेंस की जिम्मेदारी दी गई है। यदि नियमित रूप से परिसर का निरीक्षण किया जाता है तो पानी के रिसाव की समस्या समय रहते क्यों नहीं दूर की गई? वहीं, सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी होने के बावजूद बेसमेंट में कूड़ा-कबाड़ जमा होने की स्थिति कैसे बनी? सिर्फ बेसमेंट नहीं वार्डों में भी शिकायत मामला केवल बेसमेंट तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। अस्पताल की ऊपरी मंजिलों और कुछ वार्डों में भी पानी टपकने की शिकायत सामने आई है। ऐसे में अस्पताल की पूरी इमारत के रखरखाव और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। क्या अधिकारियों को इन समस्याओं की जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ? और यदि जानकारी नहीं थी, तो नियमित निरीक्षण व्यवस्था कितनी प्रभावी है? सालाना 50 करोड़ का बजट फिर भी सवाल PGI डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से PGI के लिए सालाना करीब 50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होता है। इसमें मैनपावर, मेंटेनेंस, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े खर्च शामिल हैं। ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी धनराशि और अलग से मेंटेनेंस कंपनी की मौजूदगी के बावजूद अस्पताल के बेसमेंट में पानी और गंदगी की स्थिति क्यों बनी हुई है? प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद अब निगाह इस बात पर है कि PGI प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है, क्या मेंटेनेंस कंपनी से जवाब मांगा जाता है और क्या मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान कराया जाता है। क्योंकि अस्पताल में इलाज के साथ मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलना भी जरूरी है। ये भी पढ़ें: 19 चालान के बावजूद दौड़ती रही स्लीपर बस, नौ यात्रियों की मौत के बाद उठे कई सवाल