Greater Noida Bus Fire: ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के बाद बस संचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। हादसे की जांच के बीच सामने आया है कि बस पर करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान लंबित थे। रिपोर्टों के मुताबिक, बस की फिटनेस और बीमा को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। 19 चालान के बाद भी संचालन दिल्ली से महोबा जा रही राज कल्पना ट्रेवल्स की बस 24 सितंबर की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर आग की चपेट में आ गई थी। बस में करीब 35 यात्री सवार थे। आग तेजी से फैलने के कारण नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों ने किसी तरह बाहर निकलकर जान बचाई। हादसे के बाद बस के रिकॉर्ड की पड़ताल में 19 लंबित चालानों की जानकारी सामने आई। इनमें परमिट, रेट्रोफिटिंग और अन्य नियमों से जुड़े उल्लंघनों का उल्लेख रिपोर्टों में किया गया है। कुछ चालान कम उम्र के चालक और वाहन से जुड़े नियमों के उल्लंघन को लेकर भी बताए गए हैं। स्लीपर बसों की सुरक्षा पर सवाल इस हादसे ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन निकासी व्यवस्था की नियमित जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, हादसे से पहले कुछ यात्रियों ने बस में जलने जैसी दुर्गंध और धुआं महसूस होने की बात कही थी। पुलिस इस पहलू समेत आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। जांच में तय होगी जिम्मेदारी हादसे के बाद चालक और परिचालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। पुलिस और प्रशासन बस की तकनीकी स्थिति, संचालन से जुड़े दस्तावेज और सुरक्षा मानकों की जांच कर रहे हैं। आग लगने की वास्तविक वजह और नियमों के उल्लंघन के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा। इस घटना ने लंबी दूरी की स्लीपर बसों की फिटनेस, परमिट, बीमा और सुरक्षा मानकों की निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये भी पढ़ें: बदबू आ रही थी फिर भर गया धुआं… ड्राइवर ने नहीं रोकी बस! यमुना एक्सप्रेसवे पर ‘बर्निंग बस’ का खौफनाक सच