Shivpal Singh Yadav: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने आजम खान की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं और सरकार तथा जांच एजेंसियां उन्हें लगातार परेशान कर रही हैं। आजम खान पर शिवपाल का बयान शिवपाल ने कहा कि आजम खान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उनके जेल से बाहर आने पर भाजपा को राजनीतिक नुकसान हो सकता है। शिवपाल सिंह यादव इटावा शहर स्थित कर्मक्षेत्र डिग्री कॉलेज में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आजम खान के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 'बेल मिलने के बाद भी घर नहीं जा सके आजम' शिवपाल ने कहा कि अदालत से जमानत मिलने के बावजूद आजम खान को राहत नहीं मिल पाई और जेल से बाहर आने के बाद उनके आवास पहुंचने से पहले ही ईडी की कार्रवाई शुरू हो गई। उन्होंने दावा किया कि आजम खान ने लोगों से चंदा जुटाकर विश्वविद्यालय का निर्माण कराया था, लेकिन अब इसी मामले को लेकर उन्हें परेशान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान के बाहर आने से भाजपा को राजनीतिक चुनौती मिल सकती है। शिवपाल के मुताबिक, आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा और आजम खान को न्याय मिलेगा। केशव मौर्य और राजभर पर भी टिप्पणी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवपाल ने उनकी सोच को छोटा बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां उचित नहीं हैं। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से अखिलेश यादव पर की गई टिप्पणी को भी उन्होंने गलत और घटिया सोच का नतीजा बताया। ओमप्रकाश राजभर पर सवाल पूछे जाने पर शिवपाल ने कहा कि उनकी सोच भी छोटी है। भाजपा सरकार पर लोकतंत्र को लेकर आरोप शिवपाल यादव ने भाजपा सरकार पर समाजवादी पार्टी और इंडिया गठबंधन से घबराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार लोकतंत्र और संविधान की भावना के अनुरूप काम नहीं कर रही है। साथ ही दावा किया कि मौजूदा सरकार ज्यादा समय तक सत्ता में नहीं रहेगी। कार्यक्रम के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल के योगदान को याद किया गया। इसके बाद शिवपाल के बयानों ने प्रदेश की राजनीति में आजम खान और विपक्षी एकता को लेकर चर्चा को फिर तेज कर दिया। ये भी पढ़ें: सोनिया गांधी की लालू-तेजस्वी से मुलाकात के बाद बढ़ी हलचल, क्या UP चुनाव में बनेगी विपक्ष की नई रणनीति?