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भोपाल में किसानों का आर-पार का ऐलान! सरकार से बातचीत बेनतीजा, मांगें पूरी होने तक धरना जारी

भोपाल में किसानों और सरकार के बीच वार्ता बेनतीजा रही। मूंग की 100% सरकारी खरीदी समेत अन्य मांगों को लेकर किसान धरने पर डटे हैं। सुरक्षा बढ़ाई गई, कई जगह ट्रैफिक डायवर्ट किया गया।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Bhopal Farmers Protest: मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और किसान प्रतिनिधियों के बीच देर रात तक चली बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद किसानों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे धरनास्थल से नहीं हटेंगे। आंदोलन के चलते राजधानी भोपाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि एहतियात के तौर पर कई स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है।

भोपाल पहुंचे किसान

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के नेतृत्व में प्रदेश के विभिन्न जिलों से किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय के सामने नर्मदापुरम रोड पर धरना शुरू कर दिया। रास्ते में पुलिस की ओर से लगाए गए तीन बैरिकेड पार किए गए, लेकिन पूरे आंदोलन के दौरान कहीं भी हिंसा या टकराव की स्थिति नहीं बनी। किसान नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगों पर ठोस निर्णय होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

मुआवजे की मांग

इस आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा ग्रीष्मकालीन मूंग की शत-प्रतिशत सरकारी खरीदी है। किसानों का आरोप है कि सीमित खरीदी के कारण बड़ी मात्रा में मूंग समर्थन मूल्य पर नहीं बिक पा रही, जिससे उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर पूरी उपज की खरीद, खरीदी का कोटा बढ़ाने, भुगतान में हो रही देरी समाप्त करने, खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था में सुधार और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने जैसी मांगें भी आंदोलन के केंद्र में हैं।

केंद्र के फैसले का इंतजार

इस बीच राज्य सरकार ने भी केंद्र सरकार से मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया है। सरकार ने पहले 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन केंद्र ने फिलहाल 4.54 लाख मीट्रिक टन की ही मंजूरी दी है। राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में इस वर्ष लगभग 14.30 लाख हेक्टेयर में मूंग की खेती हुई है और करीब 20.16 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। ऐसे में खरीदी का लक्ष्य बढ़ाना जरूरी है ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके।

लंबी लड़ाई का ऐलान

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 3.47 लाख किसानों ने मूंग बिक्री के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन इनमें से केवल करीब 82 हजार किसानों की उपज ही खरीदी जा सकी है। यही स्थिति किसानों की नाराजगी का बड़ा कारण बन रही है। धरनास्थल पर किसान लंबे आंदोलन की तैयारी के साथ पहुंचे हैं। कई किसान स्वयं भोजन बनाते हुए नजर आए और उनका कहना है कि जरूरत पड़ने पर वे लंबे समय तक यहीं डटे रहेंगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल मूंग की खरीदी नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों की लड़ाई है।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी

उधर, पुलिस प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और अब तक किसी प्रकार के बल प्रयोग की जरूरत नहीं पड़ी है। आम लोगों को ट्रैफिक जाम से बचाने के लिए कई मार्गों पर रूट डायवर्जन लागू किया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसानों और सरकार के बीच संवाद जारी है, जबकि किसान अपनी मांगों पर अंतिम निर्णय आने तक आंदोलन जारी रखने के फैसले पर अडिग हैं।

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