Gen Alpha,Student Protest: देश में छात्रों के आंदोलनों का स्वरूप तेजी से बदलता नजर आ रहा है। पहले Gen Z ने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की, अब उससे भी कम उम्र की Gen Alpha पीढ़ी कई राज्यों में बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतर रही है। दिलचस्प बात यह है कि इन प्रदर्शनों में मांगें बड़ी राजनीतिक नहीं, बल्कि स्कूल, सड़क, पानी, बिजली, शिक्षक और परिवहन जैसी रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी हैं। Gen Z के आंदोलन से मिली नई राह? हाल के महीनों में NEET समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के आंदोलनों ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद झारखंड में भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हुआ और सरकार ने कई परीक्षाओं तथा उनके परिणामों को रद्द करने का फैसला लिया। इन घटनाओं ने यह संदेश दिया कि छात्रों की संगठित आवाज प्रशासन और सरकार तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकती है। अब इसी बदले माहौल में Gen Alpha के बच्चे भी अपनी स्थानीय समस्याओं को लेकर मुखर होते दिखाई दे रहे हैं। कौन हैं Gen Alpha? आम तौर पर 2010 के बाद पैदा हुई पीढ़ी को Gen Alpha कहा जाता है। तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में बड़ी हो रही यह पीढ़ी अपने आसपास की समस्याओं को पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से देखती और साझा करती है। इन बच्चों के सामने रोजगार या चुनाव जैसे बड़े राजनीतिक मुद्दे फिलहाल प्राथमिकता नहीं हैं। उनकी मांगें बेहद बुनियादी हैं स्कूल में शिक्षक हों, बिजली-पंखे चलें, साफ पानी मिले, भोजन ठीक मिले, शौचालय साफ हों और स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क व परिवहन की सुविधा हो। लखनऊ में बारिश के बीच छात्राओं का प्रदर्शन Gen Alpha के हालिया प्रदर्शनों में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का मामला खास रहा। बुद्धेश्वर-मोहन रोड स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की छात्राएं शिक्षकों की कमी, भोजन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतर आईं। छात्राएं विद्यालय से करीब चार किलोमीटर दूर दुबग्गा-कानपुर बाईपास चौराहे तक पहुंचीं और हरदोई-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारिश के बीच धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के कारण सड़क पर जाम लग गया। इसके बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और छात्राओं की समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। फतेहपुर में बिजली-पानी से लेकर बेंच तक की मांग उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में भी छात्रों ने स्कूल की बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन किया। किशनपुर स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने बिजली, पंखे, शुद्ध पेयजल, साफ शौचालय, मिड-डे मील और बैठने के लिए बेंच जैसी सुविधाओं की मांग उठाई। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो विद्यालय का निरीक्षण किया गया और संबंधित समस्याओं को जल्द दूर करने के निर्देश दिए गए। हमीरपुर में सड़क बनी पढ़ाई की सबसे बड़ी बाधा हमीरपुर में छात्रों ने हाथों में तिरंगा लेकर गांव की खराब सड़क के खिलाफ कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना था कि बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। प्रशासन ने सड़क निर्माण का आश्वासन दिया और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। यानी यहां भी बच्चों की आवाज के बाद प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। राजस्थान में कहीं शिक्षक कम, कहीं खाने की शिकायत राजस्थान में भी छात्रों के प्रदर्शन ने प्रशासन का ध्यान खींचा। अलवर के थानागाजी में स्कूल में शिक्षकों की कमी और सुविधाओं की समस्या को लेकर छात्राओं ने अधिकारियों से सवाल किए। इसके बाद वहां सात नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई। सिरोही में हॉस्टल के खाने की गुणवत्ता से नाराज करीब 50 छात्राएं पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचीं। प्रशासन ने उनकी शिकायत सुनने के बाद जांच समिति बनाई और भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। बस किराया बढ़ा तो छात्राओं ने उठाई आवाज मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज में निजी बस संचालकों द्वारा छात्राओं का किराया बढ़ाए जाने का मामला भी सामने आया। बताया गया कि स्कूली छात्राओं से 10 रुपये के बजाय 25 रुपये वसूले जा रहे थे। इसके विरोध में छात्राओं ने बस स्टैंड पर प्रदर्शन किया और नारा लगाया “MLA जी, किराया कम करो।” प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पुराना किराया बहाल कर दिया गया। झारखंड में शिक्षक के तबादले पर भी प्रदर्शन झारखंड के गढ़वा में एक शिक्षक के तबादले के विरोध में छात्र सड़क पर उतर आए। स्थिति उस समय बिगड़ गई जब छात्रों को समझाने पहुंचे प्रखंड प्रमुख पर एक छात्र को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। इसके बाद नाराज छात्रों ने उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी। क्या बदल रहा है? इन घटनाओं को केवल छोटे-छोटे छात्र प्रदर्शनों के रूप में देखना आसान है, लेकिन इनके पीछे एक बड़ा बदलाव दिखाई देता है। Gen Alpha अब अपनी समस्याओं को चुपचाप सहने के बजाय सामूहिक रूप से सामने रखने लगी है। इन आंदोलनों की खास बात यह है कि मांगें सीधे जीवन और पढ़ाई से जुड़ी हैं। कई मामलों में प्रशासन ने भी विरोध को दबाने के बजाय बातचीत और समाधान का रास्ता अपनाया है। बुनियादी सुविधाओं पर बड़ा सवाल हालांकि, यह भी बड़ा सवाल है कि क्या हर छोटी समस्या के समाधान के लिए बच्चों को सड़क पर उतरना पड़ेगा? अगर स्कूलों में शिक्षक, सड़क, पानी, बिजली और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों, तो शायद Gen Alpha को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए प्रदर्शन का सहारा ही न लेना पड़े। ये भी पढ़ें: राजभवन मार्च से पहले हिरासत में तेजस्वी! पेपर लीक के खिलाफ RJD का मोर्चा