Jharkhand Govt Action: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। JPSC और JSSC से जुड़ी 45 भर्ती परीक्षाओं पर कार्रवाई की गई है। सरकार ने इनमें से 39 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है, जबकि 6 परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है। यह कार्रवाई CID और SIT जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर की गई है। 8 अधिसूचनाओं से बड़ा फैसला सरकार की ओर से मंगलवार देर रात परीक्षा रद्द करने और स्थगित करने को लेकर कुल आठ अधिसूचनाएं जारी की गईं। इस फैसले की जद में हाल के वर्षों में आयोजित परीक्षाओं के साथ-साथ कई पुरानी भर्ती परीक्षाएं भी आई हैं। इनमें डिप्टी कलेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, ड्रग इंस्पेक्टर, दंत चिकित्सक, सिविल जज, सहायक अभियंता और वन विभाग के कई पदों की परीक्षाएं शामिल हैं। 2010 से 2026 तक की परीक्षाएं सरकार के फैसले से साफ है कि जांच का दायरा केवल हाल की भर्तियों तक सीमित नहीं रहा। रद्द की गई परीक्षाओं में संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, सिविल जज, फूड सेफ्टी ऑफिसर, सहायक लोक अभियोजक, कृषि अधिकारी, डेंटल डॉक्टर, जियोलॉजिस्ट-केमिस्ट और सहायक अभियंता जैसी भर्तियां शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, सरकारी पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, मेडिकल कॉलेजों में सुपर स्पेशलिस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर और विश्वविद्यालयों के गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती भी रद्द की गई है। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर भी गिरी गाज सरकार ने आउटसोर्स एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उसके जारी परिणामों को भी रद्द करने का फैसला किया है। इसके साथ ही JSSC की CGL परीक्षा को भी रद्द किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि संबंधित मामलों में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को गंभीरता से लिया गया है। इन 6 परीक्षाओं का क्या होगा? सरकार ने छह परीक्षाओं को फिलहाल रद्द नहीं किया है, बल्कि उन्हें अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। इनमें फूड एनालिस्ट, डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन, प्रोजेक्ट मैनेजर एवं समकक्ष पद, इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज, बॉयलर इंस्पेक्टर और डायरेक्टर पद की परीक्षाएं शामिल हैं। सुधार के लिए बनेगी नई व्यवस्था सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया है। JPSC और JSSC में आंतरिक निगरानी और सतर्कता प्रकोष्ठ बनाने की तैयारी है। परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक अलग कमेटी भी गठित की जाएगी। वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली सुधार समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करने की बात भी कही है। छात्रों के भविष्य पर सवाल यह फैसला उन प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों के बाद आया है, जिन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ आंदोलन किया था। अब 45 परीक्षाओं पर हुई कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों का भविष्य और आगे की भर्ती प्रक्रिया किस तरह तय होगी। ये भी पढ़ें: तंग रास्ते, धुएं का गुबार और 9 मौतें… कोलकाता होटल अग्निकांड में आखिर कहां हुई चूक?