कानपुर। शहर के नौबस्ता थाना क्षेत्र से जीएसटी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। आरोप है कि एक कोचिंग संस्थान में महज 10 हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाले सुरक्षा गार्ड के नाम पर 3 करोड़ 14 लाख रुपये से ज्यादा की जीएसटी देनदारी दर्ज कर दी गई। जब पीड़ित को इस भारी-भरकम टैक्स रिकवरी नोटिस की जानकारी हुई तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पीड़ित ओम जी शुक्ला का कहना है कि वह एक कोचिंग संस्थान में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करता है और उसकी मासिक आमदनी करीब 10 हजार रुपये है। ऐसे में उसके नाम पर ₹3,14,56,116 की जीएसटी रिकवरी नोटिस जारी होना उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं है। आरोप है कि किसी ने उसके नाम और दस्तावेजों का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करते हुए जीएसटी से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किया और उसे भारी टैक्सपेयर के रूप में दिखा दिया। मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने संबंधित विभागों से संपर्क कर पूरे प्रकरण की जानकारी लेने की कोशिश की। आरोप है कि वह पिछले करीब एक साल से अपनी शिकायत लेकर अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहा था। लेकिन उसे कभी मामला केंद्र सरकार से जुड़ा होने की बात कहकर तो कभी दूसरे विभाग में जाने की सलाह देकर टाल दिया गया। इस दौरान करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी उसके नाम पर बनी रही। पीड़ित के मुताबिक, इस कथित टैक्स रिकॉर्ड का असर उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ा। बताया जा रहा है कि उसे भारी टैक्सपेयर दिखाए जाने के बाद उसका राशन कार्ड तक निरस्त कर दिया गया। एक तरफ मामूली वेतन और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी ने पीड़ित और उसके परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं। ये भी पढ़ें : आजम खान के ठिकानों पर ED का बड़ा एक्शन! रामपुर से दिल्ली तक 10 जगह छापे लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार ओम जी शुक्ला ने कानपुर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर पूरे मामले की शिकायत की। पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर के सामने अपने दस्तावेज और जीएसटी नोटिस से संबंधित जानकारी रखते हुए कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने और पूरे प्रकरण की जांच के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटेगी कि आखिर सुरक्षा गार्ड के नाम पर जीएसटी से जुड़ा रिकॉर्ड किसने तैयार किया। उसके दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और करोड़ों रुपये की टैक्स देनदारी उसके नाम कैसे पहुंची। जांच के दौरान फर्जी जीएसटी पंजीकरण, दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग और धोखाधड़ी के पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाएगी कि इस पूरे मामले के पीछे कोई व्यक्ति या संगठित गिरोह तो सक्रिय नहीं है। फिलहाल, 10 हजार रुपये की नौकरी करने वाले सुरक्षा गार्ड के नाम 3 करोड़ 14 लाख रुपये से अधिक की जीएसटी देनदारी का मामला चर्चा में है। पुलिस कमिश्नर के निर्देश के बाद अब पीड़ित को उम्मीद है कि जांच के जरिए मामले की सच्चाई सामने आएगी और अगर किसी तरह की धोखाधड़ी हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई होगी। ये भी पढ़ें : नई दिल्ली में UP-जापान निवेश सम्मेलन 2026 हुआ संपन्न, CM योगी ने गिनाईं निवेश की संभावनाएं