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देश में कमी नहीं… चीनी के दामों पर बोला ISMA, फिर क्यों बढ़ीं कीमतें?

ISMA ने कहा कि देश में चीनी की कमी नहीं है। जमाखोरी, सट्टेबाजी और मौसम से कीमतें बढ़ीं। सितंबर अंत तक 35 लाख टन स्टॉक रहने की उम्मीद है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Indian Sugar Association: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच चीनी उद्योग से जुड़ी संस्था इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने बड़ा दावा किया है। संगठन के मुताबिक, देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है। ISMA अध्यक्ष नीरज शिरगाओकर के अनुसार, हालिया तेजी के पीछे बाजार में सट्टेबाजी, व्यापारियों की ओर से अधिक भंडारण और गन्ने की फसल पर मौसम का असर जैसे कई कारण रहे हैं। इन वजहों से कुछ समय के लिए बाजार में आपूर्ति को लेकर दबाव बना और कीमतें ऊपर चली गईं।

जमाखोरी से बना कृत्रिम दबाव

ISMA के मुताबिक, व्यापारियों द्वारा बड़ी मात्रा में चीनी का स्टॉक रखने से बाजार में उपलब्धता प्रभावित हुई। इसके अलावा सट्टेबाजी की गतिविधियों ने भी कीमतों में तेजी को बढ़ावा दिया। मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होने से चीनी उत्पादन भी अनुमान से कम रहा। हालांकि, उद्योग संस्था का कहना है कि इसे देश में चीनी की कमी नहीं माना जा सकता। पर्याप्त स्टॉक मौजूद होने के कारण आने वाले समय में बाजार में आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है।

कब मिल सकती है राहत?

ISMA ने खुदरा उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई है। संस्था के अनुसार, जैसे-जैसे जमाखोरी और सट्टेबाजी का दबाव कम होगा, बाजार में चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी और कीमतों में गिरावट आ सकती है। शिरगाओकर के मुताबिक, सितंबर के अंत तक करीब 35 लाख टन चीनी का क्लोजिंग स्टॉक रहने का अनुमान है। इसके बाद चीनी मिलों का नया परिचालन करीब 15 अक्टूबर तक शुरू होने की उम्मीद है।

अक्टूबर में उत्पादन और मांग का अनुमान

ISMA के अनुसार, अक्टूबर में चीनी का उत्पादन करीब 10 से 12 लाख टन रह सकता है, जबकि इसी दौरान घरेलू मांग लगभग 24 से 25 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी फिलहाल उद्योग की नजर नए सीजन की शुरुआत और बाजार में स्टॉक की स्थिति पर है। यदि आपूर्ति सुचारू रहती है और जमाखोरी पर नियंत्रण होता है, तो आने वाले दिनों में बढ़ी हुई कीमतों से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

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