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शेयर बाजार में गिरावट: कच्चे तेल की तेजी और US-ईरान तनाव ने बिगाड़ा माहौल, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

सेंसेक्स 414 अंक टूटा, निफ्टी 23,750 के नीचे फिसला

सोमवार, 7 सितंबर 2026 को घरेलू शेयर बाजार दबाव में कारोबार करता नजर आया। शुक्रवार को चार दिन की गिरावट से उबरकर बाजार ने राहत की सांस ली थी, लेकिन आज फिर बिकवाली हावी रही। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया।

कैसा रहा सेंसेक्स और निफ्टी का हाल

दोपहर 3 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक बीएसई सेंसेक्स 414.46 अंक यानी 0.54 प्रतिशत टूटकर 76,100.97 के स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी50 भी 149.45 अंक यानी 0.63 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,748.25 पर कारोबार करता दिखा। सुबह के कारोबार में ही बाजार ने कमजोर शुरुआत की थी — करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 171 अंक और निफ्टी करीब 56 अंक फिसलकर 23,850 के नीचे आ गया था। दिन चढ़ने के साथ बिकवाली और गहरी होती गई।

बता दें कि शुक्रवार, 4 सितंबर को बाजार ने चार दिन की गिरावट से उबरते हुए तेजी दिखाई थी — सेंसेक्स 362.57 अंक चढ़कर 76,515.43 पर और निफ्टी 24.25 अंक की बढ़त के साथ 23,897.70 पर बंद हुआ था। आज की गिरावट ने उस बढ़त के एक बड़े हिस्से को वापस निगल लिया।

किन शेयरों और सेक्टरों में रही सबसे ज्यादा हलचल

आज के कारोबार में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और बजाज ऑटो निफ्टी50 में सबसे बड़े लूजर रहे। सेक्टोरल मोर्चे पर देखें तो आईटी, रियल्टी और पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव दिखा, जबकि फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों ने राहत दी और बढ़त के साथ बंद हुए।

ब्रॉडर मार्केट में मिला-जुला रुख देखने को मिला — निफ्टी मिडकैप 0.15 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.24 प्रतिशत की मजबूती के साथ हरे निशान में रहा। इस बीच स्मॉलकैप फार्मा कंपनी मोरपेन लैबोरेटरीज के शेयर एक झटके में 7 प्रतिशत उछलकर 52-हफ्ते के नए उच्चतम स्तर पर पहुंच गए, जबकि वोडाफोन आइडिया के शेयर भी भारी वॉल्यूम के साथ करीब 4 प्रतिशत चढ़े और 25 महीने के हाई पर पहुंच गए। दूसरी तरफ पीवीआर आइनॉक्स के शेयरों में छह महीने की सबसे तेज इंट्राडे गिरावट देखने को मिली।

गिरावट के पीछे की बड़ी वजहें

बाजार जानकारों के मुताबिक आज की कमजोरी के पीछे तीन बड़ी वजहें रहीं — पहला, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल जिससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी; दूसरा, अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव जो वैश्विक बाजारों पर असर डाल रहा है; और तीसरा, अमेरिकी फेड की ब्याज दर बढ़ोतरी को लेकर बढ़ती आशंकाएं। इसी बीच रिजर्व बैंक ने बैंकिंग सिस्टम से रिकॉर्ड लिक्विडिटी बढ़ोतरी के बाद 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की नकदी वापस खींची, जिसका असर भी बाजार की चाल पर पड़ता दिखा।

आगे क्या रुख रहने की उम्मीद

तकनीकी जानकारों की मानें तो जब तक निफ्टी 24,000-24,200 के जोन से नीचे बना रहता है, तब तक बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। नीचे की तरफ 23,700-23,800 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है। निवेशकों की नजर इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी रहेगी।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से जरूर सलाह लें।

आपकी राय में आज की गिरावट अस्थायी है या आने वाले दिनों में बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है? कमेंट में बताएं।

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