सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में बिकवाली हावी रही। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव बनाया। कैसा रहा बाजार का हाल बीएसई सेंसेक्स 307.24 अंक यानी 0.40 प्रतिशत गिरकर 76,957.27 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी50 भी 95.25 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,080.40 पर आ टिका। कारोबार के आखिरी घंटे में नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था के दौरान बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जब सेंसेक्स एक समय 339 अंक तक टूट गया था। व्यापक बाजार का रुख मिला-जुला रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.24 प्रतिशत की मजबूती के साथ हरे निशान में बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.74 प्रतिशत टूट गया। गिरावट की बड़ी वजहें अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चा तेल: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव फिर भड़कने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरा गईं। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जो उछाल के साथ करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह किसी झटके से कम नहीं, इसीलिए बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति हावी रही। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली: सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र आज के कारोबार में सबसे बड़े नुकसान में रहा। इन्फोसिस, पर्सिस्टेंट और मास्टेक जैसे शेयरों में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर भी करीब 1.2 प्रतिशत फिसले। एमएससीआई रीशफल का असर: 1 सितंबर से लागू होने वाले एमएससीआई इंडेक्स रीबैलेंसिंग को लेकर भी बाजार में सतर्कता का माहौल रहा। इस बदलाव में लॉरस लैब्स, लेंसकार्ट, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और ग्रो जैसे नाम इंडेक्स में शामिल होंगे, जबकि बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, एसबीआई कार्ड्स और एस्ट्रल को इससे बाहर किया जाएगा। चमकता रहा एचडीएफसी बैंक का शेयर गिरावट भरे माहौल में एचडीएफसी बैंक का शेयर करीब 1.9 प्रतिशत की तेजी के साथ चमका। बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन के अक्टूबर में तीसरा कार्यकाल नहीं लेने की घोषणा के बाद ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने इसे नेतृत्व परिवर्तन के लिहाज से सकारात्मक कदम बताया। एफआईआई-डीआईआई गतिविधि पिछले कारोबारी सत्र (28 अगस्त) के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 5,039.80 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 5,183.93 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। आगे क्या? निवेशकों की नजर अब अमेरिका-ईरान तनाव के आगे के घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और फेड चेयर केविन वार्श के आगामी बयानों पर टिकी रहेगी। इन वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू बाजार में निकट भविष्य में उतार-चढ़ाव जारी रहने के आसार हैं। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। आपकी राय? क्या आपको लगता है कि आने वाले दिनों में बाजार में यह गिरावट जारी रहेगी, या निवेशक इसे खरीदारी के मौके के तौर पर देखेंगे? कमेंट में हमें बताएं।