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शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं, सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी से पहले सहमति से बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के चरित्र पर दाग नहीं हैं। ऐसे रिश्तों को नैतिक अधमता या खराब चरित्र का आधार नहीं माना जा सकता।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Pre-Marital Physical Relationship || Supreme Court || Telangana Police Selection Board: शादी से पहले आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दो वयस्कों के बीच सहमति से बना संबंध न तो अनैतिकता का प्रमाण है और न ही किसी व्यक्ति को ‘खराब चरित्र’ वाला ठहराने का आधार।

क्या है पूरा मामला

सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी तेलंगाना पुलिस कांस्टेबल भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। उम्मीदवार की नियुक्ति इसलिए रोक दी गई थी क्योंकि वह पहले एक आपराधिक मामले में नामजद रहा था। मामला एक महिला के साथ प्रेम संबंध और बाद में विवाह न होने से जुड़ा था, जिसे बाद में समझौते के जरिए समाप्त कर दिया गया था।

हर प्रेम संबंध शादी तक नहीं पहुंचता

अदालत ने कहा कि हर प्रेम संबंध विवाह तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। केवल संबंध टूट जाने या शादी न होने से किसी व्यक्ति पर धोखाधड़ी या नैतिक पतन का ठप्पा नहीं लगाया जा सकता। न्यायालय ने यह भी माना कि आज के समय में समाज में विवाह से पहले संबंध सामान्य हैं और कानून भी दो अविवाहित वयस्कों को सहमति से संबंध बनाने से नहीं रोकता।

किसी की चरित्र पर नहीं उठा सकते उंगली

सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती बोर्ड के फैसले को मनमाना बताते हुए उम्मीदवार के मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया और स्पष्ट संदेश दिया कि व्यक्तिगत जीवन के आधार पर किसी के चरित्र का आकलन नहीं किया जा सकता।

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