Shiva Purana: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान करोड़ों श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भोलेनाथ की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। लेकिन पूजा के दौरान कई ऐसे सवाल सामने आते हैं, जिनका स्पष्ट उत्तर हर किसी को नहीं पता होता। जैसे- क्या महिलाएं शिवलिंग को स्पर्श कर सकती हैं? क्या घर में शिवलिंग रखना शुभ होता है? शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए या नहीं? इन सवालों के जवाब शिव महापुराण में विस्तार से मिलते हैं। शिव पुराण की कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन विषयों को समझना जरूरी है। 1. क्या शिवलिंग पर चढ़ा जल और प्रसाद ग्रहण करना चाहिए? शिव महापुराण के अनुसार भगवान शिव को अर्पित किए गए नैवेद्य और प्रसाद को ग्रहण करना शुभ माना गया है। प्रसाद को भगवान का आशीर्वाद माना जाता है और इसे श्रद्धा के साथ स्वीकार करना चाहिए। हालांकि, शिवलिंग पर सीधे चढ़ाया गया जल, दूध या अन्य द्रव्य को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। यदि शिवलिंग पर चंडेश्वर (चंडीश्वर) का अधिकार माना जाता है, तो उस पर चढ़ा जल या प्रसाद सामान्य भक्तों द्वारा ग्रहण नहीं किया जाता। वहीं, जिन शिवलिंगों में चंडेश्वर का अधिकार नहीं माना जाता या जो घर में स्थापित होते हैं, वहां परंपरा के अनुसार प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि स्थानीय मंदिर की परंपरा और पुजारी के निर्देशों का पालन करना सबसे उचित होता है। 2. क्या महिलाएं शिवलिंग को स्पर्श कर सकती हैं? यह प्रश्न लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। शिव पुराण में भगवान शिव की परम भक्त घुश्मा का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार घुश्मा प्रतिदिन बड़ी संख्या में पार्थिव शिवलिंग बनाकर स्वयं उनका पूजन करती थीं और जलाभिषेक करती थीं। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और उनके नाम पर घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई। इस कथा के आधार पर कई विद्वान मानते हैं कि महिलाओं के शिवलिंग स्पर्श करने पर कोई सार्वभौमिक धार्मिक निषेध नहीं है। हालांकि, कुछ मंदिरों की अपनी पारंपरिक व्यवस्थाएं और नियम हो सकते हैं, जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है। 3. क्या घर में शिवलिंग रखना शुभ होता है? शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव स्वयं अनादि और अनंत हैं। घर में शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है, लेकिन उसके साथ नियमित पूजा, अभिषेक और शास्त्रसम्मत नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि घर में शिवलिंग स्थापित करना हो तो उसका आकार छोटा होना चाहिए। सामान्यतः अंगूठे के आकार या उससे छोटा शिवलिंग गृहस्थ जीवन के लिए उपयुक्त माना जाता है। बड़े शिवलिंग की स्थापना मंदिरों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि उनकी नियमित विधि-विधान से पूजा आवश्यक होती है। यदि नियमित पूजा संभव न हो, तो कई विद्वान घर में शिवलिंग स्थापित करने के बजाय भगवान शिव की प्रतिमा या चित्र की पूजा करने की सलाह देते हैं। सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव आराधना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सोमवार के व्रत, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, बेलपत्र, धतूरा, आक और गंगाजल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव अत्यंत सरलता से प्रसन्न होने वाले देव हैं। इसलिए पूजा में सबसे अधिक महत्व श्रद्धा, पवित्र भाव और नियमों के पालन का माना गया है। नोट: शिव पुराण की कथाओं और पूजा-विधियों की अलग-अलग परंपराओं में व्याख्या भिन्न हो सकती है। किसी विशेष मंदिर या संप्रदाय के नियमों का पालन करना तथा स्थानीय विद्वान या पुजारी से मार्गदर्शन लेना उचित माना जाता है।