बुधवार को घरेलू शेयर बाजार पर दबाव साफ नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में लाल निशान पर बंद हुए, और इसकी सबसे बड़ी वजह बनी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाना। कहां बंद हुए सेंसेक्स और निफ्टी बीएसई सेंसेक्स आज 813.35 अंक यानी 1.08 फीसदी टूटकर 74,764.23 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी करीब 172 अंकों की गिरावट के साथ 23,432 के आसपास बंद होने में कामयाब रहा। कारोबार के दौरान निफ्टी अपने तीन महीने के निचले स्तर तक भी फिसल गया था, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बना रहा। बैंक निफ्टी भी इस बिकवाली से अछूता नहीं रहा और 310 अंक टूटकर 56,777 पर बंद हुआ। कारोबारियों का मानना है कि 56,500 से 56,000 का जोन फिलहाल इंडेक्स के लिए मजबूत सपोर्ट का काम कर सकता है। गिरावट के पीछे क्या रही असली वजह? बाजार में आज की सुस्ती का सबसे बड़ा कारण रहा ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल जाना, जिसमें करीब 2.72 फीसदी की तेज उछाल दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, बाजार अब पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले तनाव को कीमतों में शामिल करने लगे हैं, जिससे आने वाले समय में भी कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता की वजह से केंद्रीय बैंकों के लिए ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होता जा रहा है, और ऊंची ऊर्जा लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों की स्थिरता, दोनों के लिए खतरा बन सकती है। हालांकि हेज्ड.इन के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट रियांक अरोड़ा का कहना है कि इस गिरावट को व्यापक ट्रेंड में बदलाव मानने की बजाय रूटीन प्रॉफिट बुकिंग के तौर पर देखा जाना चाहिए, बशर्ते अहम सपोर्ट लेवल टूटें नहीं। किन शेयरों में रही तेजी, किनमें आई सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी 50 में आज मिलाजुला रुख देखने को मिला। टॉप गेनर्स में अडानी एंटरप्राइजेज, मैक्स हेल्थकेयर, अडानी पोर्ट्स और कोल इंडिया जैसे शेयर शामिल रहे, जिन्होंने बिकवाली के माहौल में भी बढ़त बनाए रखी। दूसरी तरफ, आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। टॉप लूजर्स की लिस्ट में इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी लाइफ और विप्रो प्रमुख रहे। ऊंची क्रूड कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निर्यात पर निर्भर आईटी कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। आगे क्या रुख रह सकता है बाजार का? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तब तक घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। 23,620–23,640 का स्तर निफ्टी के लिए फिलहाल एक अहम रुकावट के तौर पर देखा जा रहा है। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझा जाए। शेयर बाजार में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें। आपकी राय में क्या कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले हफ्तों में बाजार पर और दबाव बनाएंगी? हमें कमेंट में बताएं।