Bahraich Wolf Alert : घाघरा नदी के तटीय क्षेत्रों में भेड़ियों से खतरे और दहशत को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिले के भीरगूपुरवा और माझारा तौकली जैसे भेड़िया प्रभावित गंभीर इलाकों में वन विभाग की टीम ने गाँव के लोगों और प्रकृति प्रेमी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। मध्य क्षेत्र के सीसीएफ (CCF) रेणु सिंह, सीएफ (CF) सेमरन और डीएफओ (DFO) बहराइच सुंदरेशा, साथ ही स्थानीय ब्लॉक प्रमुखों और गाँव प्रधानों ने इस बैठक में भाग लिया। वर्ष 2026 में जनहानि शून्य, अफवाहों पर लगाम लगाने की तैयारी इस कार्यक्रम का लक्ष्य ग्रामीणों को भेड़िये के हमलों से बचाने के लिए सलाह देना था, बच्चों को सुरक्षित रखने के तरीके सिखाना था और गांवों में मौजूद जमीनी समस्याओं को समझना और ठीक करना था। अफ़सरो ने बताया कि इस वर्ष (2026 में) मुस्तैदी के चलते कोई जनहानि नहीं हुई है। अब हर मजरे में 'वन्य जीव मित्र' नामित किए गए हैं, जो वन विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे और सही सूचना देंगे, ताकि किसी भी अफवाह से विभाग की कार्रवाई न रूके। सर्वे में विकराल आंकड़े मिले वन विभाग और ICDS ने मिलकर कैसरगंज और महसी क्षेत्र के घाघरा नदी किनारे बसे गांवों में 12 साल से कम उम्र के बच्चों वाले परिवारों का सामाजिक-आर्थिक सर्वे किया। इस सर्वे के परिणाम बहुत चौंकाने वाले और सुरक्षा के दृष्टिकोण से विकराल हैं कुल 4,864 परिवार (10,747 बच्चे) बिना दरवाजे वाले घरों में रहते हैं। 2,569 परिवार खुले घरों में सोते हैं। 1,502 घरों में प्रकाश का कोई इंतजाम नहीं है। 3,796 परिवारों में टॉयलेट नहीं हैं, इसलिए खुले में जाना पड़ता है। वन विभाग ने इस गंभीर हालत को देखते हुए ग्राम विकास, जिला पंचायत राज और बिजली विभाग से निवेदन किया कि वे बारिश का मौसम शुरू होने से पहले इन कमियों को उपयुक्त तरीके से दूर करने के लिए काम करें। DM ने भेड़ियों के परमानेंट मैनेजमेंट के लिए रणनीति बनाई वन विभाग ने बहराइच जिलाधिकारी (DM) और चेयरमैन के साथ एक उच्चस्तरीय इंटरसेपैट बैठक में भेड़िये के खतरे को स्थायी रूप से कम करने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं: शहरों और घरों के पास गन्ने की खेती कम की जाए क्योंकि भेड़िये इसमें आसानी से छिप जाते हैं। भेड़िया प्रभावित और उनके मूवमेंट वाले इलाकों में आगे माइनिंग (खनन) के लाइसेंस न दिए जाएं। घाघरा नदी के पास की सभी सरकारी जमीनों का सर्वे कर कटाव रोकने और भेड़ियों के छिपने के ठिकाने खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर बांस के पौधे लगाए जाएं। प्रभावित इलाकों के सभी सीएचसी (CHC) और पीएचसी (PHC) पर एंटी-रेबीज और अन्य मेडिकल सुविधाएं चौबीसों घंटे तैयार रखी जाएं। साथ ही, प्रभावित गांवों में रात के समय फॉरेस्ट और लोकल पुलिस की जॉइंट पेट्रोलिंग (गश्त) अनिवार्य रूप से की जाए। ये भी पढ़े : District Administration Action: बिना फायर NOC और बिना नक्शे के चल रहे होटलों पर सिटी मजिस्ट्रेट का छापा