Chandrashekhar Azad: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। उनके बयान को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रुख के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके बाद विपक्षी राजनीति में संभावित तालमेल को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। क्या है पूरा मामला पूरा मामला दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान कथित गोलीबारी और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि किसी भी पुलिस कार्रवाई में गोली चलाने का निर्णय मंत्री नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी लेते हैं। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि किसी भी ऐसी घटना में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती है, इसलिए किसी भी बड़ी कार्रवाई की जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। कारसेवक गोलीकांड जिक्र चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में अयोध्या के कारसेवक गोलीकांड का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से यह दावा किया जाता रहा है कि उस समय उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री के आदेश पर कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी। लेकिन यदि आज यह कहा जा रहा है कि किसी मंत्री के आदेश से गोली नहीं चलती और निर्णय अधिकारी लेते हैं, तो फिर पुराने मामलों में भी यही सिद्धांत लागू होना चाहिए। उनके मुताबिक, हर घटना में यह स्पष्ट होना चाहिए कि आदेश किसने दिया और अंतिम जिम्मेदारी किसकी थी। आजाद ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में केवल बयान देने से काम नहीं चलता, बल्कि यह भी जरूरी है कि कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस ने किसके निर्देश पर बल प्रयोग किया और इसकी जवाबदेही कौन लेगा। उनका कहना था कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बढ़ती राजनीतिक नजदीकी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद का यह बयान समाजवादी पार्टी के उस पुराने रुख से मेल खाता है, जिसमें सपा लगातार कहती रही है कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने का फैसला प्रशासनिक स्तर पर लिया गया था, न कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के सीधे आदेश पर। ऐसे में आजाद की टिप्पणी को विपक्षी दलों के बीच बढ़ती राजनीतिक नजदीकियों के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में किसी राजनीतिक गठबंधन या चुनावी समझौते का सीधा उल्लेख नहीं किया है। लेकिन उनके बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी की ओर से क्या राजनीतिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। ये भी पढ़ें: IIT कानपुर की वेबसाइट पर छात्र का ‘साइबर स्टंट’: एडमिशन नहीं मिला तो IIT की साइट की हैक