------- KANPUR NEWS : कानपुर की पहचान से जुड़े एक ऐतिहासिक राष्ट्रभक्ति गीत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की पहल अब संसद तक पहुंच गई है। कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने लोकसभा के वर्तमान सत्र में राष्ट्रीय ध्वज गीत विधेयक, 2026 नाम से प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। इस विधेयक के जरिए प्रसिद्ध पंक्तियों विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा को भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज गीत के रूप में मान्यता देने की मांग की गई है। कानपुर सांसद रमेश अवस्थी की इस पहल को कानपुर की ऐतिहासिक और राष्ट्रवादी विरासत को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि जिस गीत को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा देने की मांग संसद में उठाई गई है, उसका सीधा संबंध कानपुर की धरती और यहां की स्वतंत्रता आंदोलन की परंपरा से है। सांसद रमेश अवस्थी की पहल का क्या है मकसद? सांसद अवस्थी ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक का मूल उद्देश्य विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना से जुड़े एक आधिकारिक गीत के रूप में पहचान दिलाना है। सांसद की पहल में यह बात भी महत्वपूर्ण है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय ध्वज गीत की पहचान राष्ट्रगान 'जन गण मन' और राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' से अलग और विशिष्ट भूमिका के रूप में रखी गई है। यानी इसका उद्देश्य राष्ट्रगान या राष्ट्रगीत के महत्व को कम करना नहीं, बल्कि तिरंगे से सीधे जुड़ी देशभक्ति की ऐतिहासिक रचना को एक औपचारिक पहचान देने की मांग करना है। विधेयक के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज गीत के लिए एक गरिमापूर्ण और मानकीकृत प्रोटोकॉल तय करने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। इसके तहत राजकीय समारोहों, शैक्षणिक संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में इस गीत के गायन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था विकसित किए जाने की परिकल्पना की गई है। कानपुर की माटी से निकला वह गीत, जो देशभर में गूंजा "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा" देश के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रभक्ति गीतों में गिना जाता है। इस अमर रचना के रचयिता श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का नाम कानपुर की राष्ट्रवादी विरासत से गहराई से जुड़ा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में जब देशवासियों के बीच राष्ट्रीय चेतना और स्वाधीनता की भावना को मजबूत करने की जरूरत थी, तब यह गीत तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति समर्पण की आवाज बनकर सामने आया। समय के साथ इसकी पंक्तियां देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रीय पर्वों और देशभक्ति के आयोजनों का हिस्सा बनती चली गईं। आज भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, तिरंगा यात्राओं और विभिन्न राष्ट्रीय आयोजनों में इस गीत की गूंज सुनाई देती है। यही वजह है कि सांसद रमेश अवस्थी द्वारा इस गीत को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा देने की मांग को कानपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर देखा जा रहा है। श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ और कानपुर का गौरव श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ को कानपुर की उस राष्ट्रवादी परंपरा का महत्वपूर्ण चेहरा माना जाता है, जिसमें साहित्य और गीतों के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास हुआ। उनकी रचना ने तिरंगे को सिर्फ एक राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि देश के स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में लोगों के मन से जोड़ने का काम किया। कानपुर की पहचान केवल औद्योगिक शहर के रूप में नहीं रही। स्वतंत्रता आंदोलन, पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी शहर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में कानपुर की धरती से जुड़े इस गीत को संसद में आधिकारिक राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा दिलाने की मांग शहर के ऐतिहासिक गौरव को भी नई चर्चा देती है। गीत को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा मिलने से क्या बदलेगा? सांसद द्वारा पेश किए गए विधेयक का एक प्रमुख उद्देश्य इस गीत के लिए औपचारिक राष्ट्रीय पहचान और प्रोटोकॉल तैयार करना है। यदि प्रस्ताव को भविष्य में संसदीय स्वीकृति मिलती है और यह कानून का रूप लेता है, तो राष्ट्रीय ध्वज गीत के गायन और उसके उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं। राजकीय समारोहों, शिक्षण संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में इसके लिए निर्धारित प्रोटोकॉल हो सकता है। इसके साथ ही नई पीढ़ी को स्वतंत्रता आंदोलन, राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति की ऐतिहासिक परंपरा से जोड़ने में भी इस गीत की भूमिका को संस्थागत रूप दिया जा सकता है। हालांकि, फिलहाल यह प्राइवेट मेंबर बिल है। बिल का संसद में पेश होना कानून बनने की अंतिम प्रक्रिया नहीं है। इसे आगे संसदीय प्रक्रिया, चर्चा और अन्य निर्धारित चरणों से गुजरना होगा। इसलिए अभी इसका उद्देश्य और प्रस्ताव सामने आया है, जबकि अंतिम निर्णय संसद की प्रक्रिया के बाद ही होगा। ये खबर भी पढ़ें : JCB के सामने ईंट लेकर खड़ी हुईं महिलाएं, अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने किया जोरदार विरोध संसद में आगे क्या होगा? अब इस विधेयक को लेकर आगे की संसदीय प्रक्रिया पर निगाहें रहेंगी। बिल पर सदन में चर्चा, विचार-विमर्श और संसदीय प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बाद ही इसकी आगे की दिशा तय होगी। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और प्रस्तावित राष्ट्रीय ध्वज गीत की भूमिका को लेकर भी संसद में व्यापक चर्चा की संभावना रहेगी। सांसद रमेश अवस्थी की ओर से इस मुद्दे को संसद में उठाए जाने से यह विषय अब स्थानीय स्तर से निकलकर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन गया है। कानपुर से जुड़े एक ऐतिहासिक गीत को आधिकारिक पहचान दिलाने की मांग के साथ अब संसद में इस पर होने वाली संभावित चर्चा भी महत्वपूर्ण होगी। कानपुर में खुशी, सांसद की पहल की हो रही सराहना सांसद रमेश अवस्थी द्वारा विधेयक पेश किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद कानपुर में इसे लेकर खुशी का माहौल है। शहर के लोगों और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों के बीच इसे कानपुर की ऐतिहासिक विरासत के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेष रूप से श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की रचना को राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा दिलाने की पहल को उनके योगदान के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि कानपुर से जुड़ी ऐसी ऐतिहासिक विरासत को संसद में स्थान मिलना पूरे शहर के लिए गौरव की बात है। सांसद रमेश अवस्थी की इस पहल ने एक बार फिर कानपुर के उस इतिहास को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में देशभक्ति की आवाज को मजबूत किया था। एक गीत, एक तिरंगा और कानपुर की पहचान "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा" इन पंक्तियों में तिरंगे के प्रति सम्मान, देश के प्रति समर्पण और राष्ट्रीय गौरव की भावना समाहित है। यही वजह है कि यह गीत पीढ़ियां बदलने के बावजूद अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। सांसद रमेश अवस्थी का इसे राष्ट्रीय ध्वज गीत का दर्जा दिलाने के लिए संसद में उठाना इस ऐतिहासिक रचना को औपचारिक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और संसदीय पहल मानी जा रही है। अब आगे की नजर संसद की प्रक्रिया पर है। यदि इस विधेयक पर सदन में विस्तार से चर्चा होती है, तो यह न केवल एक गीत की पहचान का मुद्दा होगा, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों, स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और देशभक्ति की सांस्कृतिक परंपरा पर भी व्यापक विमर्श का अवसर बनेगा। फिलहाल इतना तय है कि कानपुर की धरती से निकली देशभक्ति की वह आवाज, जो दशकों से तिरंगे के सम्मान में गूंजती रही है, अब संसद के पटल तक पहुंच चुकी है। सांसद रमेश अवस्थी की पहल ने इस गीत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की बहस को एक नया मंच दिया है और कानपुर को अपनी ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करने का एक और अवसर मिला है। ये खबर भी पढ़ें : आबान की आखिरी विदाई के बीच प्रयागराज पहुंचे उमर, पर्दों के पीछे रवाना हुआ अली