Up Congress President: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसके साथ ही सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया है। नई टीम में सामाजिक समीकरण पर जोर कांग्रेस के नए संगठन में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश नजर आती है। आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष, इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष और देवेंद्र निषाद तथा आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी के इस बदलाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को नए सिरे से तैयार करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। मिश्रा की नियुक्ति को ब्राह्मण प्रतिनिधित्व और इमरान मसूद की जिम्मेदारी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश तथा अल्पसंख्यक संपर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इसका चुनावी असर क्या होगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। आराधना मिश्रा के सामने दोहरी जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद आराधना मिश्रा कांग्रेस विधायक दल के नेता पद पर नहीं रहेंगी। उनकी जगह फरेंदा से विधायक चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल का नेता बनाया गया है। आराधना मिश्रा वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं तथा रामपुर खास से लगातार तीन बार विधायक रही हैं। अब उनके सामने प्रदेश संगठन को चुनावी मोड में लाने की जिम्मेदारी होगी। अजय राय को क्यों हटाया गया? अजय राय को अगस्त 2023 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था। उनके कार्यकाल में पार्टी ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए सड़क पर आंदोलन किए। अब चुनाव से कुछ महीने पहले नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। अजय राय के कार्यकाल को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग चर्चाएं सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में सपा के साथ गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर उनके सख्त रुख का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, कांग्रेस ने उनके योगदान की सराहना की है और राय ने भी नए पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। सपा के साथ गठबंधन भी अहम मुद्दा नई टीम के सामने समाजवादी पार्टी के साथ तालमेल भी बड़ी चुनौती होगी। कांग्रेस नेतृत्व की ओर से गठबंधन को लेकर सकारात्मक संकेत दिए गए हैं, जबकि सीट बंटवारे पर दोनों दलों की अपनी-अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं। आराधना मिश्रा ने भी नई जिम्मेदारी संभालते हुए गठबंधन धर्म निभाने की बात कही है। अब नजर इस बात पर होगी कि कांग्रेस का नया संगठन सामाजिक प्रतिनिधित्व, गठबंधन की रणनीति और जमीनी संगठन इन तीनों को किस तरह आगे बढ़ाता है। ये भी पढ़ें: दिव्या मित्तल की सियासी एंट्री! राजा भैया संग तस्वीर से बढ़ी हलचल