Europe Protests: यूरोप में बढ़ती महंगाई, महंगा ईंधन, आवास संकट और सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है। अल्बानिया में लगातार 8 दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी रहे, तो इटली ने हिंसा और लूटपाट रोकने के लिए सुरक्षा नियम सख्त कर दिए। उधर, फ्रांस के कई इलाकों में सप्ताहांत की हिंसा के बाद कर्फ्यू बढ़ाया गया है। इटली में ट्रक चालकों की हड़ताल से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति भी प्रभावित होने लगी है। अल्बानिया में आठवें दिन भी हिंसक प्रदर्शन अल्बानिया की राजधानी तिराना में मंगलवार को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच फिर टकराव हुआ। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन में हाईस्कूल और विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारी ट्यूशन फीस कम करने, शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है। महंगाई से भड़का जनाक्रोश यह आंदोलन कई महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद और व्यापक हुआ है। इससे पहले फ्लेमिंगो आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणी तट पर प्रस्तावित एक लग्जरी पर्यटन परियोजना का विरोध किया था। यह परियोजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर की निवेश कंपनी से जुड़ी बताई गई है। प्रधानमंत्री रामा ने प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग पर हिंसा के जरिए सरकार गिराने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने माना कि महंगाई, आवास और भविष्य की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन उनके मुताबिक कुछ लोग इन मुद्दों का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए कर रहे हैं। इटली में सख्त सुरक्षा कानून इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सप्ताहांत में हुई हिंसा के बाद मंगलवार को नए सुरक्षा उपायों को मंजूरी दी। इनका उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट पर अंकुश लगाना है। नए प्रावधानों के तहत सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाली कुछ सामूहिक हिंसक गतिविधियों के लिए पांच साल तक की जेल और अधिकतम 20 हजार यूरो के जुर्माने का प्रावधान है। चेहरा छिपाने या किसी के घायल होने जैसी परिस्थितियों में सजा और सख्त हो सकती है। सरकार ने नाबालिगों की ओर से की गई तोड़फोड़ और लूटपाट के मामलों में उनके माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान भी किया है। इसके अलावा, पर्याप्त आधार होने पर खतरनाक माने जाने वाले 14 से 17 वर्ष के किशोरों को अपराध किए बिना भी हिरासत में लेने की शक्ति पुलिस को देने की व्यवस्था की गई है। मेलोनी ने कहा कि तोड़फोड़ और चोरी को विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं माना जा सकता। हालांकि, सरकार के आलोचकों का कहना है कि केवल सख्त कानूनों से सामाजिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। मिलान में सुरक्षा मजबूत करने के लिए 2026 के अंत तक पुलिस की मदद के लिए 500 सैनिकों की तैनाती की भी योजना है। ट्रक चालकों की हड़ताल से खाने-पीने के सामान की किल्लत इटली में ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ ट्रक चालकों की हड़ताल से आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। नेपल्स के आसपास प्रदर्शनकारियों ने वितरण गोदामों में ताजा खाद्य पदार्थों और दूसरे सामान की लोडिंग-अनलोडिंग रोक दी। इसका असर सुपरमार्केट और पेट्रोल पंपों पर दिखाई देने लगा है। कुछ दुकानों ने ग्राहकों को चेतावनी दी है कि हड़ताल के कारण कई उत्पाद अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हो सकते या सीमित मात्रा में मिलेंगे। सिसिली में ताजा पास्ता, पनीर, मांस और सब्जियों की कमी की खबरें सामने आई हैं। कैलाब्रिया और पुगलिया के कुछ इलाकों में भी दुकानों की अलमारियां आंशिक रूप से खाली होने की जानकारी मिली है। जरूरत से ज्यादा सामान खरीदकर जमा करने को भी कुछ जगहों पर कमी की एक वजह बताया गया है। फ्रांस में बढ़ा कर्फ्यू फ्रांस में सप्ताहांत के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और लूटपाट के बाद प्रशासन ने कई इलाकों में प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं। पेरिस में स्थानीय अधिकारियों ने लगातार दूसरी रात कर्फ्यू लागू किया। फ्रांस इन्फो की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस प्रीफेक्चर ने मंगलवार रात 11 बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक प्लास द ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स के कुछ हिस्सों में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया। इन घंटों के दौरान संबंधित इलाकों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई। रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार को फ्रांस में बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे थे। इसके बाद कई जगहों पर हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। आखिर क्यों भड़क रहा है यूरोप में असंतोष? अलग-अलग देशों में विरोध के स्थानीय कारण हैं, लेकिन महंगाई, ईंधन की ऊंची कीमतें, महंगा आवास और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर नाराजगी कई जगहों पर प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। स्पेन और पुर्तगाल में भी आवास की बढ़ती कीमतों के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं, जबकि ग्रीस में रैलियों की योजना बनाई गई थी। अल्बानिया में शिक्षा और भ्रष्टाचार से जुड़ी मांगों ने सरकार विरोधी आंदोलन का रूप ले लिया है। इटली में हड़ताल से आपूर्ति प्रभावित है, जबकि फ्रांस में हिंसा के बाद सुरक्षा प्रतिबंध बढ़ाए जा रहे हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि यूरोपीय सरकारें सख्त सुरक्षा उपायों के साथ जनता की आर्थिक परेशानियों का समाधान कैसे करेंगी और क्या इससे सड़कों पर जारी विरोध थम पाएगा? ये भी पढ़ें: यूरोप के 6 देशों में सड़कों पर उतरे युवा! आखिर क्यों भड़का जनता का गुस्सा, सरकारों के सामने बढ़ी चुनौती?