विदेश

UN की कुर्सी पर भारत का दावा मजबूत, लेकिन राह में सबसे बड़ी अड़चन क्या?

भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की मांग को चार यूरोपीय देशों का समर्थन मिला। हालांकि, चार्टर संशोधन, महासभा का बहुमत और मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी जरूरी होगी।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

India UNSC Seat: भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता की मांग को 22 सितंबर 2026 को चार यूरोपीय देशों पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य का समर्थन मिला। न्यूयॉर्क में 81वें UN महासभा सत्र के दौरान हुई पहली V4+भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में यह समर्थन सामने आया।

स्थायी सीट का रास्ता इतना मुश्किल क्यों?

UNSC में स्थायी सदस्यता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन जरूरी होगा। चार्टर के अनुच्छेद 108 के मुताबिक, संशोधन को महासभा के दो-तिहाई सदस्यों से मंजूरी और फिर दो-तिहाई सदस्य देशों द्वारा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अनुमोदन चाहिए। इसमें सुरक्षा परिषद के सभी मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी अनिवार्य है। फिलहाल UNSC के पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं। इनके पास वीटो अधिकार भी है। इसलिए भारत के लिए केवल महासभा में समर्थन जुटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मौजूदा स्थायी सदस्यों की सहमति भी जरूरी होगी।

 मिल चुका है कई देशों का समर्थन

भारत लंबे समय से UNSC में सुधार और स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। वह ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह का हिस्सा है। G4 देशों की मांग है कि सुरक्षा परिषद की संरचना आज की वैश्विक वास्तविकताओं और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के अनुरूप हो। V4 देशों का ताजा समर्थन इसी व्यापक कूटनीतिक प्रयास के बीच आया है। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री ने भारत को ग्लोबल साउथ और इंडो-पैसिफिक में महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए उसे सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किए जाने का समर्थन किया।

चीन की स्थिति क्यों अहम?

भारत की दावेदारी के सामने सबसे जटिल मुद्दों में चीन की स्थिति शामिल है। UNSC सुधार पर अलग-अलग देशों और क्षेत्रीय समूहों के हित भी जुड़े हुए हैं। इसलिए व्यापक सहमति बनाना आसान नहीं है। विशेषज्ञ विश्लेषणों के अनुसार, UNSC सुधार पर बातचीत अभी भी कई मतभेदों के कारण धीमी है।

स्थायी सीट क्यों महत्वपूर्ण?

भारत अब तक आठ बार UNSC का गैर-स्थायी सदस्य रह चुका है, लेकिन ऐसे कार्यकाल दो साल के होते हैं। स्थायी सदस्यता मिलने पर भारत को अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, संघर्ष, प्रतिबंध और वैश्विक संकटों से जुड़े फैसलों में लगातार भागीदारी मिलेगी। सबसे बड़ा बदलाव वीटो अधिकार का होगा। स्थायी सदस्य के तौर पर भारत सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर अपनी स्थिति प्रभावी ढंग से रख सकेगा। साथ ही, विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण मंच पर लगातार उठाने का अवसर बढ़ेगा।

यानी चार यूरोपीय देशों का समर्थन भारत की मुहिम को नया कूटनीतिक बल जरूर देता है, लेकिन स्थायी सीट तक पहुंचने के लिए अभी व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और चार्टर संशोधन की लंबी प्रक्रिया बाकी है।

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