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बकरीद पर गाजियाबाद और आगरा के मुस्लिम परिवार की अनोखी मिसाल: बकरे की जगह काटा ‘बकरे फोटो वाला केक

मुस्लिम परिवार ने पेश की बेमिसाल सोच; जीव दया और पर्यावरण संरक्षण का दिया पैगाम, सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ।

Reported by Kashish Solanki and edited by Shagun Chaurasia

Uttar Pradesh || Agra|| Ghaziabad ||Bakra Eid : उत्तर प्रदेश के आगरा से एक बेहद खूबसूरत और दिल को छू लेने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मुस्लिम परिवार ने बकरीद (ईद-उल-अजहा) के दौरान जानवर की कुर्बानी देने की बजाय एक नई परंपरा शुरू की। इस परिवार ने बकरे की जगह बकरे के आकार का एक शानदार केक काटकर त्योहार मनाया, और इसी के जरिए इंसानियत और भाईचारे का एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। ऐसा ही एक मामला गाजियाबाद में भी देखने को मिला, जहां लोगों ने आपसी प्रेम, शांति और इंसानियत का संदेश देते हुए ईद-उल-अजहा बकरे के आकार का एक  केक काटकर मनाया।

​​​​बेजुबान जीवों के प्रति दया

ये शानदार पहल आगरा के शाहगंज इलाके की एडवोकेट गुल चमन शेरवानी  और उनके परिवार ने शुरू की है। गुल चमन का कहना है कि उनका परिवार कुछ समय से इस विचार पर काम कर रहा था कि त्योहार की खुशियों को मनाने के साथ-साथ किसी भी बेजुबान जीव की जान भी न जाए। इसी सोच के चलते इस बार बकरीद पर उन्होंने खासकर बकरे के डिजाइन वाला केक मंगवाया और परिवार के सभी सदस्यों की मौजूदगी में उसे काटा।

​पर्यावरण और इंसानियत का संदेश

परिवार का मानना है कि इस्लाम हमें शांति, करुणा और जीवों के प्रति दया का पाठ पढ़ाता है। आज के इस आधुनिक युग में हमें अपनी सोच को बदलकर पर्यावरण के संरक्षण और जीवों की दया की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। केक काटने के बाद, परिवार ने पारंपरिक तरीके से गरीबों और जरूरतमंदों के बीच खुशियां और मिठाइयां बांटीं।

सोशल मीडिया पर हो रही है प्रशंसा

बकरीद के मौके पर केक काटने की तस्वीरें और वीडियो जब आए, तो वो तुरंत सोशल मीडिया पर धूम मचाने लगे। इंटरनेट यूजर्स इस मुस्लिम परिवार की आधुनिक सोच और संवेदनशीलता की खूब तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि यह कदम समाज में रूढ़िवादिता को कम करने और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक बड़ा क़दम साबित होगा।​

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