UP Crime News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दोना-पत्तल बनाने वाली फैक्ट्री में दर्जनों मजदूरों को कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा गया था। पुलिस और श्रम विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 13 मजदूरों को मुक्त कराया गया है। बचाए गए मजदूरों की आपबीती ने जांच अधिकारियों तक को हैरान कर दिया है। आरोप है कि उन्हें बेहतर नौकरी और अच्छे वेतन का लालच देकर फैक्ट्री में बुलाया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी कैद और यातनाओं में बदल गई। सपनों से कैद तक जांच में सामने आया है कि मजदूरों को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल सहित विभिन्न स्थानों से लाया गया था। उन्हें नियमित वेतन, भोजन और रहने की सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए। इसके बाद उन्हें बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग कर दिया गया। कैद में जिंदगी मुक्त कराए गए मजदूरों के अनुसार उनसे दिन-रात काम कराया जाता था। विरोध करने या काम में कमी आने पर कथित तौर पर डंडों और अन्य साधनों से मारपीट की जाती थी। कई मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया जाता था और कभी-कभी पूरे दिन में केवल एक बार साधारण खाना मिलता था। उनकी निगरानी के लिए फैक्ट्री परिसर में पिटबुल कुत्ते रखे गए थे, जिससे कोई मजदूर भागने की हिम्मत न कर सके। मजदूरों की आपबीती सीतापुर निवासी एक मजदूर ने बताया कि उसे आठ हजार रुपये मासिक वेतन और बेहतर सुविधाओं का वादा करके बुलाया गया था। शुरुआत में सब कुछ सामान्य बताया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात बदल गए। मजदूरों को फैक्ट्री से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और किसी से संपर्क करने का भी कोई साधन नहीं छोड़ा गया था। कई लोगों के शरीर पर चोट और मारपीट के निशान पाए गए हैं। मुक्ति की कहानी इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर को फैक्ट्री से निकलने का मौका मिल गया। बताया जा रहा है कि एक दिन मुख्य संचालक की अनुपस्थिति में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हुई और एक युवक किसी तरह वहां से निकलकर पुलिस तक पहुंच गया। उसकी सूचना के आधार पर प्रशासन ने छापा मारकर सभी मजदूरों को मुक्त कराया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में लिया है और फैक्ट्री से कई ऐसे सामान बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल मजदूरों को डराने और कथित तौर पर प्रताड़ित करने में किया जाता था। पुलिस का कहना है कि मजदूरों की शारीरिक स्थिति बेहद खराब थी और कई लोगों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले हैं। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब जांच में यह जानकारी सामने आई कि बंधक बनाए गए मजदूरों में से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, जबकि दो अन्य लोगों का अभी तक कोई पता नहीं चल सका है। पुलिस अब इन दोनों की तलाश के साथ-साथ पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। मानवाधिकारों पर सवाल मुजफ्फरनगर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री मालिक की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस कथित बंधुआ मजदूरी और मानव शोषण के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल सभी मुक्त कराए गए मजदूरों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उन्हें सुरक्षित उनके घर भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई है। यह मामला केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है, जो इस कथित यातना फैक्ट्री के पीछे छिपे पूरे सच को सामने ला सकती है। ये भी पढ़ें: प्यार, सगाई और साजिश… पुणे मर्डर मिस्ट्री का खुलासा! लोहागढ़ किले पर कैसे रची केतन अग्रवाल की मौत की कहानी?