SC On CJP Protest: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और छात्रों पर कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश जारी किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र के खिलाफ फिलहाल कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। अदालत ने 18 साल से कम उम्र के छात्रों को तुरंत रिहा करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन एक अधिकार है, लेकिन पूरे मामले की जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि जिन लोगों ने कानून का उल्लंघन किया है, उनकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। CCTV और डिजिटल रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सात राज्यों को नोटिस जारी करते हुए प्रदर्शन से जुड़े सभी सबूत सुरक्षित रखने को कहा है। इसमें CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, वायरलेस कम्युनिकेशन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारी छात्रों की निजी जानकारी और डिजिटल डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाए। कोर्ट ने कहा कि सरकारों का पक्ष सुनने के बाद एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा, जो पूरे मामले की जांच करेगी। हिंसा के आरोपों का जिक्र सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने प्रदर्शन से जुड़े कई आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि याचिकाओं में पेलेट गन के इस्तेमाल, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठी से हमला और पुलिस कार्रवाई जैसे आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि एक मामले में 19 साल के युवक की आंखों की रोशनी जाने का आरोप है, जबकि एक युवती के गंभीर रूप से घायल होने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा मीडियाकर्मी से मारपीट और पुलिस पर सादे कपड़ों में कार्रवाई करने जैसे आरोपों का भी जिक्र हुआ। सरकार ने रखी अपनी दलील केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के खिलाफ किसी भी गलत कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं कर रही है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और पूरे मामले की सही जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्वों के शामिल होने की जानकारी मिली है, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। नाबालिगों की हिरासत का मुद्दा उठा सुनवाई के दौरान बिहार में हिरासत में लिए गए नाबालिग छात्रों का मामला भी उठाया गया। वरिष्ठ वकील शादान फरासत ने कहा कि कई नाबालिग अभी भी हिरासत में हैं और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि मामला केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों में हुए प्रदर्शनों और कार्रवाई से जुड़ा है। निष्पक्ष जांच का भरोसा सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि जांच पारदर्शी होगी और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। अब मामले में आगे की कार्रवाई हाई लेवल कमेटी के गठन और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। ये भी पढ़ें: असम में बाढ़ का कहर! PM मोदी ने संभाली कमान, विधायकों ने राहत के लिए दिया एक महीने का वेतन