Ajinkya Rahane : अजिंक्य रहाणे ने खत्म किया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सफर भारतीय क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद और शांत स्वभाव वाले बल्लेबाजों में गिने जाने वाले अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। 30 जुलाई 2026 को उन्होंने सभी प्रारूपों से संन्यास लेने की घोषणा करते हुए अपने लगभग 15 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत कर दिया। रहाणे ने भावुक संदेश में कहा कि भारत के लिए खेलना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा और क्रिकेट ने उन्हें ऐसे अनमोल पल दिए, जिन्हें वह हमेशा संजोकर रखेंगे। बिना शोर के बनाई अलग पहचान अजिंक्य रहाणे उन खिलाड़ियों में रहे, जिन्होंने कभी सुर्खियों के पीछे भागने के बजाय अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई। मैदान पर उनका शांत स्वभाव, संयम और मुश्किल परिस्थितियों में जिम्मेदारी उठाने की क्षमता उन्हें भारतीय टीम का अहम खिलाड़ी बनाती रही। खासकर विदेशी दौरों पर उन्होंने कई ऐसी पारियां खेलीं, जिन्होंने टीम को संकट से बाहर निकाला। रहाणे के लिए व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की सफलता मायने रखती थी। यही कारण है कि साथी खिलाड़ी और क्रिकेट प्रशंसक उन्हें एक भरोसेमंद बल्लेबाज और जिम्मेदार टीममैन के रूप में याद करेंगे। आंकड़ों में शानदार करियर रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 5,077 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 26 अर्धशतक शामिल हैं। उनका औसत 38.46 रहा। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 2,962 रन बनाए, जिनमें 3 शतक और 24 अर्धशतक शामिल रहे। वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय में उन्होंने 375 रन बनाए। आंकड़े भले ही उनकी पूरी कहानी न बताते हों, लेकिन कई मैचों में उनका योगदान भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद अहम रहा। ऑस्ट्रेलिया में रचा था इतिहास रहाणे के करियर का सबसे यादगार अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है। एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर सिमटने और नियमित कप्तान विराट कोहली की अनुपस्थिति के बाद टीम मुश्किल दौर से गुजर रही थी। ऐसे समय में रहाणे ने कप्तानी संभाली और मेलबर्न टेस्ट में शानदार शतक जड़कर टीम की वापसी की नींव रखी। उनकी शांत नेतृत्व शैली और आत्मविश्वास ने भारतीय टीम को नई ऊर्जा दी। इसके बाद भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से टेस्ट सीरीज हराकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। कप्तान के रूप में भी छोड़ी छाप रहाणे ने भारत की 6 टेस्ट मैचों में कप्तानी की। इनमें टीम ने 4 मुकाबले जीते, जबकि 2 मैच ड्रॉ रहे। उनका नेतृत्व हमेशा धैर्य, संतुलित फैसलों और खिलाड़ियों पर भरोसा करने के लिए याद किया जाएगा। संघर्ष, वापसी और यादगार विरासत रहाणे का करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा। शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें खराब फॉर्म के कारण टीम से बाहर भी होना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत कर वापसी की। यही जुझारूपन उन्हें अलग बनाता है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदाई के साथ एक ऐसे खिलाड़ी का अध्याय समाप्त हुआ, जिसने बिना किसी शोर-शराबे के भारतीय क्रिकेट को कई यादगार जीतें दीं। खासकर ऑस्ट्रेलिया में मिली ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत और संकट के समय खेली गई उनकी पारियां हमेशा भारतीय क्रिकेट इतिहास का अहम हिस्सा रहेंगी। अजिंक्य रहाणे को एक ऐसे क्रिकेटर के रूप में याद किया जाएगा, जिसने अपनी बल्लेबाजी, नेतृत्व और सादगी से करोड़ों प्रशंसकों का दिल जीता। ये भी पढ़े : नीली जर्सी की जगह भगवा क्यों? भारतीय हॉकी की नई पहचान पर छिड़ी बहस