Mahoba-Jhansi Highway: शहर की जर्जर सड़क और आए दिन लगने वाले जाम से तंग आकर मंगलवार दोपहर महोबा-झांसी हाईवे पर जेन अल्फा पीढ़ी के स्कूली बच्चों ने मोर्चा खोल दिया। सड़क ठीक कराने की मांग को लेकर दर्जनों बच्चे अचानक हाईवे पर बैठ गए। करीब 3 घंटे तक आवागमन ठप रहा। विरोध के दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और बच्चों ने पुलिस पर बदसलूकी और घसीट कर हटाने का आरोप लगाया है। बच्चों ने हाईवे घेरा दोपहर करीब 12 बजे कोतवाली क्षेत्र से गुजरने वाले हाईवे पर सरकारी और निजी स्कूलों के 10 से 14 साल के बच्चे हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे। तख्तियों पर "सड़क बनाओ, जान बचाओ", "स्कूल जाने का रास्ता सुरक्षित करो" जैसे नारे लिखे थे। बच्चों का कहना था कि पिछले 6 महीने से उनके स्कूल वाली सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। बारिश में पानी भर जाता है और रोज गिरकर चोट लगती है। कई बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसलिए आज क्लास के बाद सभी सीधे हाईवे पर पहुंच गए। प्रदर्शन शुरू होते ही हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। एंबुलेंस और स्कूल बसें भी फंस गईं। पुलिस और बच्चों के बीच तकरार सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने बच्चों को समझाकर सड़क से हटाने की कोशिश की। इसी दौरान नोक-झोंक शुरू हो गई। कक्षा 8 की एक छात्रा ने आरोप लगाया, हम शांति से बैठे थे। पुलिस वाले आए और बिना कुछ पूछे हाथ पकड़कर घसीटने लगे। एक टीचर को भी धक्का दिया गया।" वहीं कुछ अन्य बच्चों ने कहा कि पुलिस ने लाठी दिखाकर डराया और वीडियो बनाने से रोका। बच्चों का प्रदर्शन खत्म एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर बच्चों से बातचीत के बाद करीब 3 बजे प्रदर्शन खत्म कराया। इसके बाद ही ट्रैफिक सामान्य हो सका। सीओ सिटी ने कहा, "बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें हाईवे से हटाना जरूरी था। किसी के साथ मारपीट नहीं की गई। बस भीड़ हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। सड़क की समस्या को लेकर पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखा जाएगा।" पुलिस ने बताया कि इस मामले में अभी कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। प्रशासन का आश्वासन घटना के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम ने बच्चों और अभिभावकों को आश्वासन दिया कि 15 दिन के अंदर सड़क की मरम्मत का काम शुरू कराया जाएगा। तब तक अस्थायी रूप से गड्ढों को भरवाया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हाईवे से रोज 20 से ज्यादा स्कूलों के बच्चे गुजरते हैं। दो बार हादसे भी हो चुके हैं। फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन बच्चों के इस अनोखे विरोध ने प्रशासन की नींद जरूर उड़ा दी है। ये भी पढ़ें: पेंशनर भवन का प्रशासन ने किया निरीक्षण, मरम्मत न होने पर 19 अगस्त को ‘चेतना दिवस’ की चेतावनी