बुधवार को घरेलू शेयर बाजार एक बार फिर दबाव में नजर आया। सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24 फीसदी टूटकर 77,966.35 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 35.75 अंक यानी 0.15 फीसदी की गिरावट के साथ 24,435.95 के स्तर पर आ गया। यह लगातार दूसरा कारोबारी सत्र है जब दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए हैं। कच्चे तेल ने बिगाड़ा माहौल बाजार में सुस्ती की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रही। ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और होरमुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी गहरा गई है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, महंगा कच्चा तेल सीधा असर डालता है—रुपये पर दबाव, महंगाई की चिंता और कंपनियों की लागत बढ़ने का खतरा। यही वजह रही कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। किन शेयरों ने संभाला, किसने डुबोया गिरावट के बीच भी कुछ सेक्टरों ने राहत दी। मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखी गई, जिसमें हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एसबीआई, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, नेस्ले इंडिया और टेक महिंद्रा प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे। एसबीआई ने शुरुआती कारोबार में सबसे मजबूत प्रदर्शन करते हुए 1.42 फीसदी तक की छलांग लगाई। दूसरी तरफ आईटी और हेल्थकेयर शेयरों पर दबाव भारी पड़ा। टीसीएस, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, मैक्स हेल्थकेयर, अपोलो हॉस्पिटल्स, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहे। बड़ी आईटी कंपनियों में कमजोरी का असर पूरे सेक्टर पर दिखा। ब्रॉडर मार्केट का हाल व्यापक बाजार का रुझान मिला-जुला रहा। बीएसई मिडकैप इंडेक्स करीब 0.28 फीसदी की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.18 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह दिखाता है कि बड़े शेयरों में बिकवाली के बीच भी चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। विदेशी निवेशकों का रुख मंगलवार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 258.55 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 24.77 करोड़ रुपये के शेयरों की खरीदारी की। यानी दोनों तरफ से हल्की खरीदारी का रुझान रहा, भले ही बाजार समग्र रूप से नरम रहा हो। आगे क्या? तकनीकी विश्लेषकों की मानें तो सेंसेक्स अपने 200-दिन के EMA से नीचे कारोबार कर रहा है, जो निकट अवधि में कुछ कमजोरी का संकेत देता है। निफ्टी के लिए 24,300 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है, जहां से बाजार में रिकवरी की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि लंबी अवधि के चार्ट पर तेजी का ढांचा—यानी ऊंचे टॉप और ऊंचे बॉटम का पैटर्न—अभी भी बरकरार है, जो दिखाता है कि मौजूदा गिरावट एक बड़े अपट्रेंड के भीतर सामान्य करेक्शन भी हो सकती है। निवेशकों की नजर अब आगे अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति और कच्चे तेल की चाल पर टिकी रहेगी, क्योंकि यही अगले कुछ सत्रों की दिशा तय करेंगे। डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न समझें। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है, कृपया निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें। आपकी राय जरूरी है: क्या आपको लगता है कि कच्चे तेल की कीमतें आने वाले हफ्तों में बाजार पर हावी रहेंगी? कमेंट में बताएं।