Delhi DTC Bus Strike: दिल्ली में डीटीसी बस चालकों की हड़ताल का असर अब यात्रियों की रोजमर्रा की यात्रा के साथ-साथ उनके मासिक बजट पर भी दिखाई देने लगा है। हड़ताल को करीब एक सप्ताह हो चुका है और बस सेवा बाधित होने के कारण नियमित यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। बस पास रखने वाले यात्रियों की परेशानी सबसे ज्यादा है। कई लोगों ने पूरे महीने के सफर का खर्च पहले ही पास के रूप में चुका दिया है, लेकिन बसें उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें दफ्तर, दुकान और काम पर जाने के लिए ऑटो, कैब या रैपिडो का सहारा लेना पड़ रहा है। सफर का खर्च फिर भी अलग नियमित यात्रियों का कहना है कि बस पास का सबसे बड़ा फायदा यह है कि महीनेभर के परिवहन खर्च का हिसाब पहले से तय रहता है। लेकिन हड़ताल ने यह व्यवस्था बिगाड़ दी है। पास अभी वैध है, इसके बावजूद रोजाना वैकल्पिक वाहन पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। लंबे रूट पर जाने वाले यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। बस नहीं मिलने पर कई लोग पहले ऑटो, कैब या रैपिडो से मेट्रो स्टेशन या किसी कनेक्टिंग प्वाइंट तक पहुंच रहे हैं। इसके बाद मेट्रो या अन्य साधन से आगे का सफर पूरा करना पड़ रहा है। बस स्टैंड से मोबाइल बुकिंग तक बदला सफर हड़ताल के सातवें दिन बस स्टैंड और टर्मिनल पर यात्रियों को निर्धारित रूट की बसों का इंतजार करते देखा गया। काफी देर तक बस नहीं आने पर लोग मोबाइल से कैब और रैपिडो का किराया देखने लगे, जबकि कई यात्री ऑटो की तलाश में निकल गए। यात्रियों के मुताबिक, शुरुआत में समस्या सिर्फ बसों के इंतजार तक सीमित थी, लेकिन अब हर दिन वैकल्पिक साधनों का खर्च जेब पर भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि हड़ताल जितनी लंबी चलेगी, नियमित यात्रियों का यात्रा बजट उतना ही प्रभावित होगा। ये भी पढ़ें: BJP संगठन में बड़ा फेरबदल, तावड़े को UP की कमान; स्मृति-राम माधव को भी अहम जिम्मेदारी