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मदरसा शिक्षा आतंकवाद ही पैदा करता है… केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने बढ़ाई सियासी गर्मी

केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों पर बयान से यूपी की राजनीति गरमा गई। वहीं, योगी कैबिनेट आज कामिल-फाजिल डिग्रियों पर रोक लगाने समेत मदरसा शिक्षा में बड़े बदलाव पर फैसला ले सकती है।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Keshav Prasad Maurya: उत्तर प्रदेश में मदरसों को लेकर एक बार फिर सियासी माहौल गर्म हो गया है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के विवादित बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। वहीं, इसी बीच योगी सरकार भी मदरसा शिक्षा से जुड़े एक अहम फैसले की तैयारी में है, जिससे इस मुद्दे ने और तूल पकड़ लिया है।

केशव का बड़ा बयान

केशव प्रसाद मौर्य ने एक बयान में कहा कि “मदरसा चाहे बांग्लादेश का हो, पाकिस्तान का हो या भारत का, यदि वास्तव में देखा जाए तो वे अघोषित रूप से आतंकवादियों को तैयार करने की फैक्ट्री हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि मदरसों का मूल चरित्र आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला रहा है। उनका यह बयान लेखिका तस्लीमा नसरीन की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के हालात का हवाला देते हुए मदरसों को बंद करने की बात कही थी। मौर्य ने उनके विचारों का समर्थन किया।

बढ़ा राजनीतिक विवाद

डिप्टी सीएम के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं और राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश हैं।

इधर, उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलाव के तहत मदरसों में संचालित ‘कामिल’ (स्नातक) और ‘फाजिल’ (परास्नातक) स्तर की पढ़ाई पर रोक लगाने का फैसला लिया जा सकता है। यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो राज्य के मदरसों में केवल 12वीं कक्षा तक की शिक्षा ही संचालित होगी। साथ ही, भविष्य में इन उच्च स्तरीय डिग्रियों का संचालन बंद कर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियमों के अनुरूप उठाया जा रहा है।

डिग्रियों पर रोक

प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी स्पष्ट किया कि बिना वैधानिक अनुमति के कामिल और फाजिल जैसे पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे थे। उनके अनुसार, इन डिग्रियों की मान्यता और प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं थी, इसलिए इन्हें बंद करने का निर्णय लिया जा रहा है।

फिलहाल, एक ओर केशव प्रसाद मौर्य का बयान राजनीतिक विवाद का केंद्र बना हुआ है, तो दूसरी ओर योगी कैबिनेट के संभावित फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो उत्तर प्रदेश की मदरसा शिक्षा व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा, जबकि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी गूंज भी लंबे समय तक सुनाई दे सकती है।

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