Parliament Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। विपक्षी सांसदों ने मकर द्वार पर प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कई मुद्दों पर सदन में जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जब तक गृह मंत्री संबंधित मामलों पर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं करते, तब तक कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा आगे बढ़ाना मुश्किल होगा। अमित शाह के बयान की मांग कांग्रेस नेताओं ने 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि इन मुद्दों पर गृह मंत्री के संसद में बयान देने तक गतिरोध बने रहने की संभावना है। वहीं केसी वेणुगोपाल ने कहा कि एफसीआरए संशोधन विधेयक समेत अन्य विधेयकों पर चर्चा से पहले अमित शाह को सदन में आकर छात्रों से जुड़े मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। FCRA बिल पर भी विरोध एफसीआरए विधेयक को लेकर भी विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने प्रस्तावित बदलावों को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि इनका असर सामाजिक संगठनों और देशहित से जुड़े कार्यों पर पड़ सकता है। विपक्ष का आरोप है कि संशोधनों से शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संस्थानों के संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका है। आदिवासी पहचान पर कांग्रेस का सवाल कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने विश्व आदिवासी दिवस के संदर्भ में आदिवासी पहचान का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय को ‘वनवासी’ कहने से उसकी ऐतिहासिक पहचान और विशिष्टता कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री के सदन में आने पर इस विषय को प्रमुखता से उठाया जाएगा। भगत ने एफसीआरए में प्रशासनिक खर्च की सीमा से जुड़े प्रस्तावित बदलाव पर भी चिंता जताई और इसे मौलिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए। झारखंड छात्र आंदोलन पर भी नजर झारखंड में छात्रों के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस नेताओं ने शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की। नेताओं ने कहा कि प्रदर्शन लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी असामाजिक तत्व को माहौल बिगाड़ने का मौका न मिले। इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर जोर समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने परिसीमन के मुद्दे पर कहा कि विपक्ष की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं लाया गया है और फिलहाल इस विषय पर चर्चा की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सरकार से अपने स्तर पर निर्णय लेने को कहा। धर्मेंद्र यादव ने इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं के बयानों से गठबंधन की एकता प्रभावित नहीं होगी। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या अमित शाह के बयान के बाद संसद का गतिरोध खत्म होगा या विपक्ष का विरोध मानसून सत्र की कार्यवाही पर और भारी पड़ेगा? ये भी पढ़ें: रांची में छात्रों का हल्लाबोल! बैरिकेडिंग तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े प्रदर्शनकारी, कंधों पर पहुंचे देवेंद्र महतो