Smriti Irani: चुनाव आयोग और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया। कांग्रेस पर ईरानी का पलटवार बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़े करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावी हार की समीक्षा करने के बजाय कांग्रेस चुनाव आयोग को निशाना बना रही है। ईरानी ने यह भी सवाल उठाया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार नहीं है, वहां की चुनावी प्रक्रिया को लेकर पार्टी का रुख क्या है। ‘डुप्लीकेट नाम क्यों रहने दें?’ स्मृति ईरानी ने मतदाता सूची में मृत और डुप्लीकेट नामों से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उनका दावा था कि चुनाव आयोग ने ऐसे मामलों की जांच और सत्यापन के लिए बूथ लेवल अधिकारियों के जरिए प्रक्रिया स्पष्ट की है। ईरानी ने सवाल किया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दो बार दर्ज है या संबंधित व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है, तो ऐसे नामों को लेकर कांग्रेस की आपत्ति क्यों है। यह मुद्दा विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा है। चुनाव आयोग ने हाल में प्रक्रिया से जुड़े कई कदमों और सत्यापन व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण दिया है, जबकि कांग्रेस पारदर्शिता और मतदाता सूची में बदलाव की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रही है। 2019 के बयान का किया जिक्र ईरानी ने अपने संबोधन में 2019 के राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं पर हमला अलग बात है, लेकिन लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से बचना चाहिए। A.O. ह्यूम और कांग्रेस के इतिहास का जिक्र स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के इतिहास और लाहौर अधिवेशन के संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस के गठन में ब्रिटिश अधिकारी ए.ओ. ह्यूम की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने इतिहास के उस पक्ष पर भी चर्चा करनी चाहिए। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार ए.ओ. ह्यूम भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं में थे और 1885 में कांग्रेस के पहले अधिवेशन में महासचिव रहे। वे ब्रिटिश शासन में राजस्व, कृषि और वाणिज्य विभाग के सचिव भी रहे थे। इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस और बीजेपी के बीच चुनाव आयोग, SIR और मतदाता सूची को लेकर टकराव आगे बढ़ता दिख रहा है। ये भी पढ़ें: SIR विवाद के बीच CWC में खड़गे का बड़ा ऐलान, चुनाव आयोग से 5 मांगें! जानिए पूरा मामला