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’26 दिन भूखा रहा, 11 किलो वजन घटा फिर भी सबूत चाहिए?’ सोनम वांगचुक का भावुक सवाल

26 दिन के अनशन के बाद सोनम वांगचुक ने डील के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने अस्पताल में पाबंदियों का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें अपनी ईमानदारी साबित नहीं करनी चाहिए।

Reported by Shagun Chaurasia and edited by Shagun Chaurasia

Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक चले अपने आमरण अनशन को समाप्त करने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से उन आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है, जिनमें उनके अनशन खत्म करने को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी तरह की “डील” ही करनी होती, तो 26 दिनों तक भीषण गर्मी में भूखे रहने और अपनी सेहत दांव पर लगाने की कोई जरूरत नहीं थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या 11 किलो वजन कम होने के बाद भी उन्हें अपनी ईमानदारी का प्रमाण देना पड़ेगा?

डील करनी होती तो अनशन क्यों करता

सोनम वांगचुक ने कहा कि कुछ लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने किसी समझौते के तहत अपना अनशन समाप्त किया। इन आरोपों पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि समझौता ही करना होता, तो वह आरामदायक कमरे में बैठकर भी ऐसा कर सकते थे। उन्होंने कहा कि 26 दिनों तक लगातार भूखे रहना और अपनी सेहत को खतरे में डालना किसी दिखावे के लिए संभव नहीं है।

अस्पताल को बताया छावनी जैसा माहौल

वांगचुक ने बताया कि 18 जुलाई को उन्हें जंतर-मंतर से जबरन सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। उनके अनुसार, अस्पताल का माहौल किसी सामान्य चिकित्सा केंद्र जैसा नहीं, बल्कि एक सख्त सुरक्षा वाले परिसर जैसा था। उन्होंने दावा किया कि उन पर लगातार निगरानी रखी गई और उनकी गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां थीं।उन्होंने कहा कि अस्पताल में उन्हें किसी से स्वतंत्र रूप से मिलने की अनुमति नहीं थी। केवल सीमित संख्या में परिजनों को मिलने दिया गया। उनका आरोप है कि मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य संचार माध्यमों के उपयोग की भी अनुमति नहीं थी, जिसके कारण वे अपने समर्थकों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।

नेपकिन पर लिखकर भेजे संदेश

सोनम वांगचुक ने बताया कि संचार के सभी सामान्य साधन बंद होने के कारण उन्होंने कई बार कागज या नेपकिन पर संदेश लिखकर बाहर भेजने की कोशिश की। उनका दावा है कि इनमें से कुछ संदेश रास्ते में ही रोक दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि लद्दाख से मिलने आए कई समर्थकों को उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

अस्पताल से निकलने का भी किया दावा

वांगचुक ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद भी उन्हें तुरंत अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिली। उनका कहना है कि काफी प्रयासों और विरोध के बाद ही वह अस्पताल से बाहर निकल सके। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें पुलिसकर्मियों के साथ उनकी बहस दिखाई देती है। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम उनके लिए बेहद निराशाजनक रहा।

मेदांता अस्पताल को लेकर भी लगाए आरोप

उन्होंने दावा किया कि बाद में जब उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया, तब भी वहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। वांगचुक के अनुसार, वहां भी आने-जाने और लोगों से मिलने पर प्रतिबंध जैसे हालात बने रहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ये वीडियो सार्वजनिक नहीं किए, क्योंकि वह किसी कर्मचारी या अधिकारी की नौकरी पर असर नहीं डालना चाहते थे।

सोनम वांगचुक का यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब उनके आंदोलन और उसे लेकर राजनीतिक व सामाजिक स्तर पर लगातार चर्चा जारी है। वहीं, उनके आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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