उत्तर प्रदेशनोएडा

10 दिन की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, 10 हजार मरीज लौटे, 300 से ज्यादा सर्जरी टलीं

GIMS में आउटसोर्स कर्मचारियों की 10 दिन तक चली हड़ताल का असर सीधे मरीजों पर पड़ा। इलाज से लेकर सर्जरी तक कई जरूरी सेवाएं प्रभावित रहीं। बड़ी संख्या में मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा।

Reported by India Headlines TV and edited by Tanvi Pandey

GIMS Strike: राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों की हड़ताल लगातार 10 दिन तक चली। इस दौरान अस्पताल की सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं। इलाज कराने पहुंचे हजारों मरीजों को निराश होकर वापस जाना पड़ा। अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक 10 हजार से ज्यादा मरीज बिना इलाज लौटे। इनमें कई मरीज बाद में नोएडा जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंचे।

सर्जरी भी करनी पड़ी स्थगित

हड़ताल का असर ऑपरेशन सेवाओं पर भी दिखाई दिया। करीब 300 से ज्यादा सर्जरी तय समय पर नहीं हो सकीं। मरीजों को बाद में नई तारीख पर आने के लिए कहा गया। कई लोगों ने इंतजार करने की बजाय निजी अस्पतालों का रुख किया। इससे मरीजों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा और परेशानी भी बढ़ी।

ओपीडी में मरीजों की संख्या घटी

आम दिनों में जिम्स की ओपीडी में हर दिन करीब 1400 से 1900 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन हड़ताल शुरू होने के बाद कई दिनों तक यह संख्या घटकर 200 के आसपास रह गई। हालांकि एक-दो दिन नर्सिंग छात्रों और बाहर से बुलाई गई नर्सों की मदद से मरीजों की संख्या कुछ बढ़ी, लेकिन सामान्य व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी।

पंजीकरण बंद होने से मरीज हुए परेशान

हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने मरीजों के बैठने वाले स्थान पर ही धरना दिया। इससे पंजीकरण का काम लगभग पूरी तरह रुक गया। ग्रेटर नोएडा के साथ-साथ नोएडा, बुलंदशहर, खुर्जा, अलीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से आए मरीजों को बिना इलाज वापस लौटना पड़ा।

इमरजेंसी सेवा ही चलती रही

हड़ताल के दौरान केवल इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं। पुराने मरीजों को जरूरत के अनुसार इलाज मिलता रहा, लेकिन नए मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रोजाना करीब एक हजार मरीजों को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ा।

100 स्टाफ नर्स की मांग भेजी गई

जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि अस्पताल की सेवाएं पहले की तरह शुरू करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए शासन को पत्र भेजकर आसपास के सरकारी संस्थानों से 100 स्टाफ नर्स उपलब्ध कराने की मांग की गई है। फिलहाल ओपीडी के साथ आईपीडी सेवाएं भी दोबारा शुरू कर दी गई हैं।

ओपीडी के आंकड़ों दिखा हड़ताल का असर

अगर पिछले दिनों के ओपीडी रिकॉर्ड पर नजर डालें तो सामान्य दिनों में रोजाना करीब 1500 से 1900 मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे थे। 1 जून को 1955, 2 जून को 1632, 3 जून को 1852, 4 जून को 1550, 5 जून को 1790, 6 जून को 1575 मरीज आए। 8 जून को 1688, 9 जून को 1600, 10 जून को 1526, 11 जून को 1600, 12 जून को 1688 और 13 जून को 1480 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया। वहीं 7 और 14 जून को छुट्टी होने के कारण सिर्फ 87 और 82 मरीज ही पहुंचे।

मरीजों की संख्या गिर गई

15 जून से शुरू हुई हड़ताल का असर पहले ही दिन दिखाई देने लगा। उस दिन सिर्फ 208 मरीज ओपीडी पहुंचे। 16 जून को यह संख्या 125 रह गई। 17 जून को 300, 18 जून को 200 और 19 जून को 320 मरीज ही अस्पताल पहुंचे। बाद में व्यवस्था में कुछ सुधार होने पर 20 जून को 670 मरीज आए। 21 जून की छुट्टी पर सिर्फ 53 मरीज पहुंचे। इसके बाद 22 जून को 1082, 23 जून को 1121 और 24 जून को 1258 मरीज ओपीडी पहुंचे। हालांकि यह संख्या भी सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम रही।

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