Maharshi ashram: नोएडा में महर्षि आश्रम की जमीन से जुड़े मामले में अब नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने आश्रम की जमीन पर बने फ्लैट और निर्माण को अवैध घोषित कर दिया है। साथ ही लोगों से अपील की है कि इन जमीनों या फ्लैटों में किसी तरह का निवेश न करें। 51 खसरों की जमीन पर रोक प्राधिकरण ने ग्राम सलारपुर खादर, भंगेल और हाजीपुर के 51 खसरों की जमीन पर खरीद-बिक्री रोक दी है। ईडी ने इन जमीनों से जुड़ी जानकारी मांगी थी। जांच एजेंसी ने यह भी पूछा है कि अगर निर्माण की अनुमति नहीं थी तो इतने बड़े स्तर पर मकान और फ्लैट कैसे बन गए। बिजली-पानी की सुविधा पर रोक प्राधिकरण ने साफ किया है कि इन जमीनों पर बिजली, पानी, सीवर, सड़क और नाली जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाएंगी। लोगों को चेतावनी दी गई है कि ऐसे भूखंडों या फ्लैटों की खरीद से बचें। अधिकारियों पर उठे सवाल मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इन जमीनों पर लगातार निर्माण हो रहा था और हजारों फ्लैट बेचे जा रहे थे, तब संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे। अब जांच में अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। फर्जी कागजों से बेची गई ट्रस्ट संपत्ति जांच के दौरान एसआईटी को 40 और संपत्तियों की रजिस्ट्रियां मिली हैं। इससे पहले 34 रजिस्ट्रियां सामने आ चुकी थीं। ईडी की जांच में सामने आया है कि फर्जी प्राधिकरण पत्र, नकली बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली मुहरों का इस्तेमाल कर ट्रस्ट की जमीन बेची गई। जांच के दायरे में कई अधिकारी ईडी इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। निबंधन विभाग के दो सब-रजिस्ट्रारों से पूछताछ भी हो चुकी है। इसके अलावा कई पीसीएस अधिकारी और नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं। तीन महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर बनी एसआईटी को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। वहीं ईडी वित्तीय लेनदेन, अधिकारियों की भूमिका और पूरे मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। आध्यात्मिक केंद्र की जमीन पर हुआ निर्माण जानकारी के अनुसार, स्पिरिचुअल रिजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया ट्रस्ट की करीब 40 बीघा जमीन फर्जी दस्तावेजों के जरिए बेची गई। बिना मानचित्र स्वीकृति के यहां बड़ी संख्या में फ्लैट और मकान बना दिए गए। महर्षि महेश योगी ने 1970 और 1980 के दशक में यहां आश्रम और वैदिक शिक्षा केंद्र की स्थापना की थी, लेकिन बाद में इस जमीन पर अवैध कब्जों और निर्माण के आरोप सामने आए। ये भी पढ़े : नोएडा में डिजिटल गोल्ड के नाम पर 3.16 करोड़ की साइबर ठगी, कारोबारी 5 महीने तक जाल में फंसा