उत्तर प्रदेशनोएडा

EPF नियमों में बड़ा बदलाव! 2026 से बदल जाएगी पूरी व्यवस्था, कंपनियों के लिए सख्त होंगे नए नियम

2026 से EPF के नए नियम लागू होंगे। छूट, ट्रस्ट संचालन, निवेश, ऑडिट और अंशदान पर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। कंपनियों को तय समय में नए नियमों का पालन करना होगा।

Reported by himanshu singh and edited by Shagun Chaurasia

EPF New Rules 2026: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत अब EPF एवं MP अधिनियम, 1952 की जगह EPF योजना-2026 और सामाजिक सुरक्षा केंद्रीय नियम-2026 लागू होंगे। नए प्रावधानों के साथ छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों, नियोक्ताओं और ट्रस्टों के लिए सख्त मानक तय किए गए हैं।

छूट पर नई शर्तें

नई व्यवस्था के अनुसार, मौजूदा छूट फिलहाल जारी रहेगी, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए सभी पात्र प्रतिष्ठानों को 8 मई 2026 से पहले औपचारिक आवेदन करना होगा। अब छूट स्थायी नहीं होगी, बल्कि शुरुआती मंजूरी केवल तीन वर्ष के लिए मिलेगी। इसके बाद नवीनीकरण वित्तीय स्थिति, डिजिटल एकीकरण और जोखिम आधारित ऑडिट के आधार पर होगा।

नियमों के तहत छूट वही प्रतिष्ठान प्राप्त कर सकेंगे जो कर्मचारियों को वैधानिक लाभों के बराबर या उससे बेहतर सुविधाएं देंगे। साथ ही आवेदन से पहले लगातार तीन वर्षों तक किसी भी तरह का वैधानिक उल्लंघन या डिफॉल्ट नहीं होना चाहिए।

देरी पर सख्त जुर्माना

सरकार ने निरीक्षण शुल्क और देरी पर लगने वाले दंड को भी सख्त किया है। EPF निरीक्षण शुल्क वेतन का 0.35 प्रतिशत (न्यूनतम 8,750 रुपये) और EDLI के लिए 0.005 प्रतिशत (न्यूनतम 1,250 रुपये) तय किया गया है। अंशदान में देरी होने पर चरणबद्ध ब्याज लगेगा, जबकि समय पर विवरणी जमा नहीं करने पर प्रतिदिन जुर्माना और अतिरिक्त दंडात्मक ब्याज भी वसूला जाएगा।

कम रिटर्न की भरपाई

छूट प्राप्त संस्थानों में अब पांच साल के कार्यकाल वाला न्यासी बोर्ड अनिवार्य होगा, जिसमें नियोक्ता और कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। सभी ट्रस्टों को प्रत्येक तिमाही RPFC को रिपोर्ट भेजनी होगी और किसी भी वित्तीय चूक के लिए नियोक्ता व न्यासी संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे। निवेश संबंधी नियम भी बदले गए हैं। सभी निवेश SEBI पंजीकृत डिपॉजिटरी में डीमैट रूप में रखने होंगे। यदि ट्रस्ट EPFO से कम रिटर्न देता है, तो अंतर की भरपाई नियोक्ता करेगा।

जवाबदेही होगी मजबूत

इसके अलावा, 29 जून 2026 से शुरू हुई एकमुश्त क्षमादान योजना के तहत बिना अधिसूचना संचालित ट्रस्टों को नियमित होने का अवसर मिलेगा। नए रोडमैप के अनुसार अंशदान, वार्षिक विवरण और बिना दावे वाली राशि जमा करने की समय-सीमा तय कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से EPF प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

ये भी पढ़ें: चोरों के हौसले बुलंद! फाइनेंस कंपनी के बाहर से AC यूनिट उड़ाई, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Translate »