Etawah News: इटावा के डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल होने वाला स्ट्रेचर लकड़ियां ढोने के काम आता नजर आया। बुधवार शाम करीब छह बजे मोतीझील चौराहे के पास अस्पताल कर्मचारियों द्वारा स्ट्रेचर पर लकड़ियां लादकर ले जाने का वीडियो सामने आया है। अस्पताल के इस इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि मरीजों की सुविधा के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग आखिर किस काम में किया जा रहा है। स्ट्रेचर पर लकड़ियां क्यों? मामले से जुड़े वीडियो में अस्पताल के कर्मचारी स्ट्रेचर पर लकड़ियां रखकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे पहले इसी स्ट्रेचर पर पानी की मोटर भी ले जाई गई थी। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने जब कर्मचारियों से मरीजों के लिए इस्तेमाल होने वाले स्ट्रेचर पर सामान ले जाने की वजह पूछी, तो उन्होंने अस्पताल के दूसरे कर्मचारी आनंद कुमार का नाम लिया। CMS के आदेश का दावा वीडियो में पूछताछ के दौरान आनंद कुमार ने बताया कि वे स्ट्रेचर पर मोटर लेकर गए थे और वहां से जलाने के लिए लकड़ियां लेकर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सीएमएस साहब को इसकी जानकारी है और उनके आदेश पर ही मोटर ले जाने के बाद लकड़ियां लाई जा रही हैं। वीडियो बनाने वाले व्यक्ति के सवालों पर कर्मचारी ने यह भी कहा कि जो वीडियो बनाना है, बना लो, उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता। मरीजों के स्ट्रेचर पर सामान ढुलाई अस्पताल में स्ट्रेचर का इस्तेमाल गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। मरीज की हालत गंभीर होने या चलने में असमर्थ होने पर स्ट्रेचर काफी जरूरी होता है। ऐसे में अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा इसी संसाधन पर मोटर और लकड़ियां ढोने का मामला सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई इस मामले में जब अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. पारितोष शुक्ला से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस घटना की जानकारी होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि इस तरह की कोई बात सामने आती है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिम्मेदारी पर अब भी सस्पेंस बताया गया कि सीएमएस दिन में कोर्ट संबंधी कार्य में व्यस्त थे। बाद में फोन पर संपर्क कर उन्हें पूरे मामले की जानकारी दी गई। फिलहाल, वीडियो में कर्मचारियों के दावों और सीएमएस के बयान के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि स्ट्रेचर पर मोटर और लकड़ियां ले जाने की अनुमति किसने दी थी। मामले में जिम्मेदारी तय होने और अस्पताल प्रशासन की ओर से जांच किए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ये भी पढ़ें: 18 महीने बाद खुला सौरभ हत्याकांड वाला घर, बेड से उठ रही थी बदबू! अंदर का मंजर देख रो पड़े मां और भाई